हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक थाई कार्गो जहाज पर हुए हमले के बाद बचे हुए तीन नाविकों ने जहाज के मालिकों के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाया है। इन नाविकों का आरोप है कि हमले से पहले ईरान की ओर से दी गई चेतावनियों को कंपनी ने नजरअंदाज किया, जिसके कारण उनकी जान खतरे में पड़ गई। यह मामला 10 जुलाई 2026 को बैंकॉक की सेंट्रल लेबर कोर्ट में दर्ज कराया गया है।
हमले की पूरी घटना
थाईलैंड का कार्गो जहाज Mayuree Naree, 11 मार्च 2026 को ओमान के उत्तर में हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था, तभी उस पर दो रॉकेटों से हमला किया गया। इस दुखद घटना में चालक दल के तीन सदस्यों की जान चली गई, जबकि 20 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। यह इलाका उस समय काफी तनावपूर्ण था क्योंकि ईरान, अमेरिका और इसराइल के बीच संघर्ष चल रहा था। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाज निशाने पर हो सकते हैं।
मुआवजे की मांग और कंपनी का पक्ष
पीड़ित नाविकों- Panithi Tumkaew, Noppadon Wongsuvan और Surades Manpuen ने कंपनी से प्रति व्यक्ति कम से कम 1 मिलियन थाई बात (लगभग 30,000 डॉलर) के मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि हमले के बाद जहाज बेकार हो गया और उन्हें अनुबंध पूरा होने से पहले ही नौकरी से निकाल दिया गया। इन नाविकों को अब PTSD जैसी मानसिक समस्या है और वे काम करने की स्थिति में नहीं हैं।
दूसरी ओर, Precious Shipping Co. ने स्टॉक एक्सचेंज ऑफ थाईलैंड को बताया कि उन्हें अभी तक आधिकारिक दस्तावेज नहीं मिले हैं। कंपनी का दावा है कि उन्होंने चालक दल के प्रति अपनी सभी जिम्मेदारियां निभाई हैं और उन्हें हर संभव मदद प्रदान की है।
