नौकरी करने वालों के लिए समय पर सैलरी मिलना सबसे ज़रूरी होता है, लेकिन कई कंपनियां इसमें देरी करती हैं। अब ऐसे मामलों में सरकार सख्त कार्रवाई की तैयारी में है और कर्मचारियों के लिए अपने अधिकारों को जानना बहुत ज़रूरी हो गया है। अगर आपकी सैलरी समय पर नहीं मिल रही है, तो कानून आपको कई अधिकार देता है।

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सैलरी देरी होने पर कर्मचारी क्या कदम उठा सकते हैं

अगर कंपनी सैलरी देने में देरी कर रही है, तो कर्मचारी सीधे तौर पर कई कानूनी रास्ते अपना सकते हैं। सबसे पहले कंपनी के HR या अकाउंट्स विभाग को ईमेल के ज़रिए लिखित में जानकारी दें। अगर वहां सुनवाई नहीं होती है, तो वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भेजा जा सकता है। इसके अलावा, जिला स्तर पर लेबर कमिश्नर के ऑफिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

  • शिकायत के माध्यम: शिकायत ऑनलाइन e-Shram पोर्टल, राज्य के लेबर डिपार्टमेंट की वेबसाइट या समाधान पोर्टल पर भी की जा सकती है।
  • कोर्ट का सहारा: कर्मचारी लेबर कोर्ट या सिविल कोर्ट में बकाया वेतन के लिए दावा पेश कर सकते हैं।
  • NCLT का विकल्प: अगर कंपनी की आर्थिक हालत खराब है और बकाया सैलरी 1 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच है, तो नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में केस किया जा सकता है।
  • ज़रूरी दस्तावेज़: शिकायत के समय अपॉइंटमेंट लेटर, बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप और कंपनी के साथ हुए ईमेल की कॉपी ज़रूर रखें।

कंपनी के लिए क्या हैं नियम और सजा

भारत में पेमेंट ऑफ वेजेस एक्ट 1936 और कोड ऑन वेजेस 2019 जैसे कानून कर्मचारियों के वेतन की सुरक्षा करते हैं। इन नियमों के तहत कंपनियों को एक तय समय सीमा के अंदर सैलरी देना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों और अधिकारियों पर भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है।

विवरण नियम या जुर्माना
1000 से कम कर्मचारी वाली कंपनी 7 तारीख तक सैलरी देना ज़रूरी
1000 या उससे ज़्यादा कर्मचारी 10 तारीख तक सैलरी देना ज़रूरी
नौकरी छोड़ने पर सेटलमेंट 2 वर्किंग डेज में पूरा भुगतान
पहली बार गलती पर जुर्माना 1,500 से 7,500 रुपये
बार-बार देरी पर जुर्माना 10,000 रुपये तक
गंभीर उल्लंघन पर सजा 6 महीने तक की जेल
NCLT केस की सीमा 1 लाख से 1 करोड़ रुपये तक

सरकार लेबर कानूनों में बदलाव भी कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में वेज कोड रूल्स और इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड पर चर्चा की है। साथ ही, 1 अप्रैल 2026 से एक नया नियम लागू होगा, जिसके तहत कर्मचारी की कुल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक पे और महंगाई भत्ता (DA) होना चाहिए। इससे कंपनियों का खर्च बढ़ेगा लेकिन कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग और पीएफ में बढ़ोतरी होगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सैलरी न मिलने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए

सबसे पहले कंपनी के HR या अकाउंट्स विभाग को लिखित ईमेल भेजें। अगर वहां समाधान न हो, तो वकील के ज़रिए लीगल नोटिस भेजें या लेबर कमिश्नर के ऑफिस में शिकायत दर्ज करें।

1 अप्रैल 2026 से सैलरी नियम में क्या बदलाव होगा

नए नियमों के मुताबिक, कर्मचारी की कुल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक पे और महंगाई भत्ता होना चाहिए। इससे टेक-होम सैलरी कम हो सकती है लेकिन पीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ ज़्यादा मिलेगा।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.