यरूशलेम में सोमालीलैंड की तरफ से कथित दूतावास खोलने के फैसले पर सऊदी अरब, अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने कड़ी आपत्ति जताई है। 24 मई 2026 को सऊदी अरब, मिस्र, कतर, तुर्की और पाकिस्तान समेत 14 देशों ने मिलकर एक साझा बयान जारी किया। इन देशों ने सोमालीलैंड के इस कदम को पूरी तरह से गैरकानूनी और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करार दिया है। इस मामले को लेकर खाड़ी देशों और अन्य मुस्लिम देशों में काफी चर्चा हो रही है।
आखिर क्यों भड़के सऊदी अरब समेत 14 देश?
सऊदी अरब, मिस्र, कतर, जॉर्डन, तुर्की, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, जिबूती, सोमालिया, फिलिस्तीन, ओमान, सूडान, यमन और लेबनान के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर इस फैसले का विरोध किया है। इन देशों का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन है और इससे यरूशलेम की कानूनी और ऐतिहासिक स्थिति पर असर पड़ता है। बयान में साफ किया गया है कि यरूशलेम को लेकर किसी भी एकतरफा फैसले को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही इन देशों ने सोमालिया की एकता और संप्रभुता का पूरा समर्थन किया है।
सोमालीलैंड और इजरायल के बीच क्या हुआ था?
इससे पहले 19 और 20 मई 2026 को सोमालीलैंड के इजरायल में राजदूत डॉ. मोहम्मद हागी ने यरूशलेम में दूतावास खोलने की घोषणा की थी। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बीच बढ़ते संबंधों और रणनीतिक सहयोग का हिस्सा बताया था। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी इस फैसले का स्वागत किया था। बता दें कि इजरायल ने 26 दिसंबर 2025 को सोमालीलैंड की स्वतंत्रता को आधिकारिक मान्यता दी थी, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच करीबी बढ़ी है।
संगठनों और अन्य देशों ने क्या कहा?
इस मामले पर सोमालिया के विदेश मंत्रालय ने 21 मई 2026 को ही अपना विरोध दर्ज करा दिया था और इस कदम को पूरी तरह अवैध बताया था। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया कि पूर्वी यरूशलेम 1967 से ही कब्जे वाला फिलिस्तीनी इलाका है और वहां ऐसा कोई कदम स्वीकार्य नहीं है। इसके अलावा इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और अरब लीग ने भी इसे सोमालिया की संप्रभुता का उल्लंघन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ बताया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यरूशलेम में सोमालीलैंड का दूतावास खोलने का विरोध क्यों हो रहा है?
सऊदी अरब और 14 अन्य देशों का मानना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करता है और पूर्वी यरूशलेम की कानूनी स्थिति को प्रभावित करता है, जिसे 1967 से कब्जे वाला फिलिस्तीनी इलाका माना जाता है।
इजरायल ने सोमालीलैंड को कब मान्यता दी थी?
इजरायल ने आधिकारिक तौर पर 26 दिसंबर 2025 को सोमालीलैंड की स्वतंत्रता को मान्यता दी थी, जिसके बाद दोनों के बीच राजनयिक संबंध बढ़े हैं।