सऊदी अरब में खेती-बाड़ी का चेहरा पूरी तरह बदल गया है। साल 2016 में जहाँ उत्पादन केवल 6 मिलियन टन था, वह अब बढ़कर 12 मिलियन टन के पार पहुँच गया है। यह सब विजन 2030 के तहत किया गया है ताकि देश अपनी खाद्य जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहे और खुद के पैरों पर खड़ा हो सके।
सऊदी अरब में खेती का उत्पादन कितना बढ़ा?
सऊदी अरब के पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय ने बताया कि 2024 तक कृषि और खाद्य वस्तुओं का कुल उत्पादन 16 मिलियन टन के पार चला गया है। पिछले पांच सालों में इस सेक्टर की जीडीपी में हर साल 7 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। साल 2024 में इस सेक्टर ने देश की जीडीपी में करीब 114 अरब सऊदी रियाल (31.5 अरब डॉलर) का योगदान दिया। इस पूरी कामयाबी के पीछे सरकार की बड़ी फंडिंग और प्राइवेट कंपनियों का निवेश है।
| विवरण | आंकड़े/जानकारी |
|---|---|
| उत्पादन (2016) | 6 मिलियन टन |
| उत्पादन लक्ष्य (2025) | 12 मिलियन टन से ज्यादा |
| कुल उत्पादन (2024) | 16 मिलियन टन से ज्यादा |
| सरकारी फंडिंग | 25 अरब सऊदी रियाल से अधिक |
| प्राइवेट निवेश | 36 अरब सऊदी रियाल से अधिक |
| जीडीपी योगदान (2024) | 114 अरब सऊदी रियाल |
| सालाना विकास दर (GDP) | 7 प्रतिशत से ज्यादा |
खेती को बढ़ाने के लिए सरकार ने क्या खास किया?
सऊदी सरकार ने खेती को आधुनिक बनाने और उसे मुनाफे का सौदा बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। इनमें मुख्य बातें ये हैं:
- स्मार्ट खेती: खेती में नई टेक्नोलॉजी और स्मार्ट तरीकों का इस्तेमाल शुरू किया गया है।
- स्थानीय उत्पादन: मुर्गियों और अनाज के उत्पादन को देश के अंदर ही बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
- बाहरी निवेश: SALIC कंपनी के जरिए दूसरे देशों में भी कृषि निवेश बढ़ाया गया है।
- खाद्य सुरक्षा: भविष्य के लिए अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों का खास भंडार (Strategic Reserves) बनाया गया है।
- आसान कर्ज: सऊदी एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट फंड के जरिए किसानों और प्रोजेक्ट्स को कम ब्याज पर लोन दिए गए हैं।