सऊदी अरब में खेती-बाड़ी का काम अब देश की कमाई में बड़ी भूमिका निभा रहा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कृषि क्षेत्र ने देश की जीडीपी (GDP) में 124 अरब रियाल का योगदान दिया है। सरकार अब तेल के भरोसे रहने के बजाय खेती जैसे दूसरे कामों को बढ़ावा दे रही है ताकि देश में खाने-पीने की चीजों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।
पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय (MEWA) ने हाल ही में ‘हलवा बी मौसिमहा’ नाम से एक अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मकसद स्थानीय स्तर पर उगने वाले फलों को बढ़ावा देना और किसानों की मार्केटिंग व्यवस्था को बेहतर बनाना है। मंत्रालय के मुताबिक, पिछले पांच सालों में इस सेक्टर में 7% से ज्यादा की सालाना बढ़त देखी गई है।
आत्मनिर्भरता और उत्पादन में बढ़त
सऊदी अरब ने कई जरूरी चीजों के उत्पादन में बड़ी कामयाबी हासिल की है। अब झींगा मछली का उत्पादन 149% और डेयरी उत्पादों का 131% तक पहुँच गया है। इसके अलावा, अंडे और खजूर के उत्पादन में भी देश अपनी जरूरत से ज्यादा पैदावार कर रहा है। खजूर के मामले में सऊदी अरब दुनिया के बड़े उत्पादकों में शामिल है और हर साल 3 लाख टन से ज्यादा खजूर निर्यात करता है।
किसानों की मदद और नई तकनीक
सरकार के REEF प्रोग्राम के जरिए अब तक 3,605 किसानों को आर्थिक मदद दी गई है, जिसमें करीब 74% महिलाएं हैं। साथ ही, पानी की बर्बादी रोकने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे 2016 के मुकाबले खेती में इस्तेमाल होने वाले गैर-नवीकरणीय पानी की खपत में 52% की कमी आई है।
आर्थिक आंकड़े और निवेश
| विवरण | आंकड़ा/राशि |
|---|---|
| वर्तमान जीडीपी योगदान (कृषि) | 124 अरब रियाल |
| 2016 में जीडीपी योगदान | 54 अरब रियाल |
| 2025 में जीडीपी योगदान | 118 अरब रियाल |
| 2030 तक का लक्ष्य | 140 अरब रियाल |
| 2030 तक अनुमानित कुल निवेश | 70 अरब डॉलर |
| REEF प्रोग्राम के तहत वित्तीय मदद | 41.86 मिलियन रियाल |
| जेद्दा फूड क्लस्टर निजी निवेश लक्ष्य | 20 अरब रियाल |
जेद्दा में एक नया फूड क्लस्टर बनाया गया है, जिसका मकसद निजी क्षेत्र से 20 अरब रियाल का निवेश लाना है। सरकार का मानना है कि इससे आने वाले दस सालों में देश की जीडीपी में करीब 7 अरब रियाल का इजाफा होगा।