सऊदी अरब में पर्यावरण को लेकर एक नया अपडेट सामने आया है। देश के अधिकांश हिस्सों में हवा की गुणवत्ता काफी अच्छी यानी ग्रीन रेंज में दर्ज की गई है। लेकिन मक्का के केंद्रीय क्षेत्र, विशेष रूप से ग्रैंड मस्जिद यानी हरम शरीफ के आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता में गिरावट देखी गई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि वहां हज यात्रियों की भीड़ और वाहनों के आवागमन के कारण प्रदूषण के कण बढ़े हैं।

मक्का और पवित्र स्थलों में हवा की स्थिति कैसी है?

मक्का और अन्य पवित्र स्थलों में वायु गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए कुल 11 निगरानी केंद्र काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मक्का के कुछ हिस्सों में ओजोन का स्तर पीले निशान तक पहुंच गया है। वहीं ग्रैंड मस्जिद के पास केंद्रीय क्षेत्र में धूल के बारीक कण यानी PM2.5 और PM10 का स्तर बढ़कर ‘ऑरेंज रेंज’ में पहुंच गया है। ऑरेंज रेंज का मतलब है कि यह हवा संवेदनशील लोगों, जैसे सांस के मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सेहतमंद नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि हज यात्रा के दौरान भीड़ और वाहनों की आवाजाही के कारण हवा में यह बदलाव देखा गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह और धूल भरी आंधी का अलर्ट

सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्मियों के दौरान धूल भरी आंधी को लेकर पहले ही चेतावनी जारी की थी। मंत्रालय ने कहा है कि जिन लोगों को सांस की बीमारी या एलर्जी है, वे बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतें। नेशनल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल कंप्लायंस (NCEC) और नेशनल सेंटर ऑफ मेटियोरोलॉजी (NCM) लगातार मौसम और हवा की गुणवत्ता पर नजर रख रहे हैं ताकि प्रवासियों और हज यात्रियों को समय पर जरूरी जानकारी मिल सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

मक्का में हवा की गुणवत्ता खराब होने का मुख्य कारण क्या है?

मक्का के केंद्रीय क्षेत्र और ग्रैंड मस्जिद के आसपास हज यात्रा के दौरान वाहनों की आवाजाही और भारी भीड़ के कारण धूल के बारीक कण बढ़ गए हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।

सऊदी अरब में वायु गुणवत्ता की निगरानी कौन करता है?

सऊदी अरब में नेशनल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल कंप्लायंस (NCEC) पर्यावरण मानकों को तय करने और हवा की गुणवत्ता की लगातार निगरानी करने के लिए जिम्मेदार है।