सऊदी अरब ने 31 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से इराक में मौजूद मिलिशिया के ठिकानों पर हवाई हमले की पुष्टि की है। सऊदी अधिकारियों ने इसे एक ‘नापा-तुला और सीमित’ कदम बताया है जो इराक स्थित मिलिशिया द्वारा सऊदी ऊर्जा सुविधाओं पर किए गए ड्रोन हमलों के जवाब में उठाया गया है। यह कार्रवाई 29 और 30 जुलाई 2026 की रात को हुई, जिसमें अमेरिका भी सऊदी अरब के साथ मिलकर शामिल था।

हमले के पीछे की मुख्य वजह

सऊदी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि 27 और 28 जुलाई को इराकी मिलिशिया ने सऊदी अरब के तेल संयंत्रों को निशाना बनाकर कई ड्रोन हमले किए थे। अमेरिकी सेंटकॉम (CENTCOM) ने जानकारी दी कि इन 72 घंटों के भीतर करीब 30 ड्रोन हमले किए गए थे, जिनका मकसद ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाना था। सऊदी अरब ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा का अधिकार बताया है।

इराक और ईरान का रुख

इस हमले पर इराक सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है। इराकी प्रवक्ता हाइदर अल-अबूदी ने कहा कि हमले की कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी और उनके पास सऊदी आरोपों का कोई सबूत नहीं है। उन्होंने इसे इराक की संप्रभुता का उल्लंघन बताया। रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों में 18 लोग मारे गए और 20 लोग घायल हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी इन हमलों की निंदा की है और पुष्टि की है कि मारे गए लोगों में 5 IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के सदस्य भी शामिल हैं। फिलहाल कतर ने सऊदी अरब के पक्ष में अपना समर्थन दोहराया है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.