सऊदी अरब ने खेती-बाड़ी को आधुनिक बनाने और पानी की बचत के लिए 8.7 अरब रियाल देने का फैसला किया है। इस पहल का मकसद पानी का सही इस्तेमाल करना और खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है। यह खबर सऊदी वॉटर वीक 2026 के मौके पर सामने आई है।
सऊदी अरब की सरकार अब खेती में नई तकनीक लाने पर जोर दे रही है। इसके लिए Ministry of Environment, Water and Agriculture (MEWA) काम कर रही है। सरकार चाहती है कि खेती में पानी की बर्बादी कम हो और संसाधनों का सही उपयोग हो सके ताकि भविष्य में पानी की कमी न हो।
सऊदी विजन 2030 के तहत सिंचाई के तरीकों को सुधारने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए स्मार्ट सिंचाई सिस्टम, रिमोट मॉनिटरिंग, ड्रोन और हाइड्रोपोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। यहाँ तक कि पेड़ों को लगाने के लिए मिट्टी में पानी रोकने के लिए नैनोटेक्नोलॉजी का भी प्रयोग हो रहा है।
जेद्दा में 28 जून से 2 जुलाई 2026 तक सऊदी वॉटर वीक मनाया जा रहा है। इस दौरान पर्यावरण और जल मंत्री अब्दुलरहमान अलफदली ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया। सऊदी अरब मार्च 2027 में रियाद में 11वें वर्ल्ड वॉटर फोरम की मेजबानी भी करेगा।
खेती और पानी से जुड़े कुछ मुख्य आंकड़े नीचे दिए गए हैं:
| विवरण | राशि/लक्ष्य |
|---|---|
| कृषि तकनीक और जल दक्षता के लिए बजट | 8.7 अरब रियाल |
| रियाद में शुरू हुई परियोजनाएं | 9.8 अरब रियाल |
| रियाद में आगामी परियोजनाओं की नींव | 28.3 अरब रियाल |
| कुल 181 पहलों का खर्च | 38 अरब रियाल से ज्यादा |
| पानी उत्पादन लागत में कटौती का लक्ष्य | 50% |
| भूजल उपयोग में कमी का लक्ष्य (2035 तक) | 90% |
| कृषि क्षेत्र में उपचारित अपशिष्ट जल का लक्ष्य | 80 मिलियन क्यूबिक मीटर |
सरकार का लक्ष्य है कि 2035 तक गैर-नवीकरणीय भूजल के इस्तेमाल को बहुत कम किया जाए। साथ ही, ट्रीटेड वेस्टवॉटर यानी साफ किए गए गंदे पानी का इस्तेमाल खेती और उद्योगों में बढ़ाया जाएगा। 2025 तक इस दिशा में 30% की कामयाबी मिल चुकी है।
