Saudi Arabia और सात अन्य इस्लामिक देशों ने मिलकर इसराइल की हरकतों पर कड़ा ऐतराज जताया है। 23 अप्रैल 2026 को जारी एक साझा बयान में इन देशों ने यरूशलेम के इस्लामिक और ईसाई पवित्र स्थलों के साथ हो रहे खिलवाड़ की निंदा की। इन देशों ने कहा कि इसराइल बार-बार उन नियमों को तोड़ रहा है जो इन पवित्र जगहों की सुरक्षा और मर्यादा के लिए बनाए गए थे।

अल-अक्सा मस्जिद में क्या हुआ और क्यों है नाराजगी?

  • अवैध प्रवेश: इसराइली पुलिस की सुरक्षा में कट्टरपंथी मंत्रियों और बस्तियों के लोगों ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर में जबरन प्रवेश किया।
  • झंडा फहराना: मस्जिद के आंगन में इसराइल का झंडा फहराया गया, जिसे इस्लामिक देशों ने बेहद गलत बताया।
  • अंतरराष्ट्रीय कानून: इन हरकतों को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन और दुनिया भर के मुसलमानों के लिए एक उकसावा माना गया।
  • मस्जिद का हक: बयान में साफ कहा गया कि 144-दुनम का पूरा अल-अक्सा परिसर सिर्फ मुसलमानों की इबादत की जगह है।

इसराइल पर और क्या गंभीर आरोप लगाए गए?

इन देशों ने सिर्फ मस्जिद ही नहीं, बल्कि अन्य मुद्दों पर भी इसराइल को घेरा। उन्होंने बताया कि इसराइल ने 30 से ज्यादा नई बस्तियां बनाने की मंजूरी दी है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियमों और 2024 की ICJ राय के खिलाफ है। साथ ही, फिलिस्तीनी स्कूलों और बच्चों के खिलाफ बस्तियों में होने वाली हिंसा की भी कड़ी निंदा की गई। बयान में यह साफ कर दिया गया कि कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र पर इसराइल का कोई अधिकार नहीं है।

इस्लामिक देशों ने अब क्या मांग की है?

  • दो देशों का समाधान: इन देशों ने मांग की कि एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश बनाया जाए, जिसकी राजधानी पूर्वी यरूशलेम हो।
  • पुरानी सीमाएं: यह नया देश 4 जून 1967 की सीमाओं के आधार पर होना चाहिए।
  • विस्थापन का विरोध: फिलिस्तीनी लोगों को उनकी जमीन से हटाने या उनके इलाकों को हड़पने की किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज किया गया।
  • संरक्षण: पवित्र स्थलों के मामले में जॉर्डन की खास भूमिका और उसकी कस्टोडियनशिप को बनाए रखने पर जोर दिया गया।
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.