सऊदी अरब की राजधानी रियाद में पुलिस ने भीख मांगने के आरोप में कई प्रवासियों को गिरफ्तार किया है। रियाद पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (Criminal Investigation Department) ने कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों को भीख मांगते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। इन सभी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सऊदी प्रशासन इस समय पूरे देश में भीख मांगने वालों और संगठित गिरोहों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चला रहा है।

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सऊदी अरब में भीख मांगने पर कितनी सजा मिलेगी?

सऊदी अरब के कानून के अनुसार भीख मांगना एक दंडनीय अपराध है। जो भी विदेशी नागरिक इसमें शामिल पाया जाता है, उसे कड़ी सजा का सामना करना पड़ता है। इसमें जेल और जुर्माना दोनों शामिल हैं। सजा पूरी होने के बाद दोषी को सऊदी अरब से निकाल दिया जाता है और उसके दोबारा आने पर रोक लगा दी जाती है। केवल हज या उमराह वीज़ा को छोड़कर वे भविष्य में काम के लिए सऊदी नहीं आ पाएंगे।

  • साधारण भीख मांगना: 1 साल तक की जेल या 1 लाख सऊदी रियाल तक का जुर्माना लग सकता है।
  • संगठित गिरोह: जो लोग भीख मंगवाने का काम करते हैं या दूसरों को इसके लिए उकसाते हैं, उन्हें भी 1 साल की जेल और भारी जुर्माना देना होगा।
  • मदद करने वाले: भीख मांगने वालों की सहायता करने वालों को 6 महीने की जेल या 50 हजार रियाल का जुर्माना हो सकता है।

विदेशी प्रवासियों पर हो रही है कड़ी कार्रवाई

सऊदी प्रशासन ने हाल के दिनों में हजारों की संख्या में उन लोगों को डिपोर्ट किया है जो उमराह या अन्य वीज़ा पर आकर भीख मांगते पकड़े गए थे। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार हजारों पाकिस्तानी नागरिकों को इसी आरोप में वापस भेजा गया है। पुलिस ने साफ किया है कि लोग भीख मांगने वालों की सूचना 911 (मक्का, मदीना और पूर्वी क्षेत्र) या 999 पर दे सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि भीख के जरिए मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल गलत गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में भी हो सकता है।

मामले का प्रकार निर्धारित सजा और जुर्माना
सामान्य भीख मांगना 1 साल जेल या 1 लाख रियाल जुर्माना
संगठित गिरोह चलाना 1 साल जेल और 1 लाख रियाल जुर्माना
भीख में सहयोग देना 6 महीने जेल या 50 हजार रियाल जुर्माना