Saudi Arabia News: सऊदी अरब ने डायबिटीज के मरीजों के लिए दी नई बायोसेंसर डिवाइस को मंजूरी, अब होगी 24 घंटे निगरानी.

सऊदी अरब ने डायबिटीज यानी मधुमेह के मरीजों के लिए एक बहुत ही खास और नई मेडिकल डिवाइस को बेचने की अनुमति दे दी है। यह तकनीक देश में पहली बार अधिकृत की गई है जिससे शुगर के मरीजों को अपनी सेहत पर नजर रखने में बहुत आसानी होगी। इस नई तकनीक का मुख्य उद्देश्य मरीजों को लगातार और सही समय पर सही जानकारी देना है ताकि गंभीर मामलों में डॉक्टर तुरंत और तेजी से इलाज कर सकें। 20 अगस्त 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार यह डिवाइस खून में ग्लूकोज और कीटोन बॉडी दोनों के स्तर को 24 घंटे लगातार माप सकती है।
सऊदी अरब में डायबिटीज की देखरेख और नए कदम
सऊदी अरब में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। पिछले कुछ सालों में देश के मेडिकल सेक्टर में कई बड़े बदलाव और फैसले देखने को मिले हैं। उदाहरण के लिए, 17 अगस्त 2023 को सऊदी खाद्य और औषधि प्राधिकरण यानी SFDA ने बिना सुई वाले शुगरबीट (sugarBEAT) ग्लूकोज सेंसर को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने पिछले साल अक्टूबर 2025 में दुनिया का पहला डायबिटीज कमांड एंड सेंटर भी शुरू किया था, जिससे पूरे देश में डायबिटीज से जुड़े स्वास्थ्य आंकड़ों पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से नजर रखी जाती है।
हालांकि, इस नई बायोसेंसर डिवाइस की मंजूरी को लेकर आधिकारिक सूत्रों और SFDA की तरफ से कोई बहुत बड़ी घोषणा सीधे तौर पर सामने नहीं आई है, लेकिन इस तरह की आधुनिक तकनीक आने से आम जनता और वहां रहने वाले प्रवासियों को काफी राहत मिलती है। सऊदी अरब में काम करने वाले लाखों भारतीय और अन्य देशों के प्रवासी भी इन आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। जब भी बाजार में कोई नया मेडिकल उपकरण आता है, तो वहां रहने वाले सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां और इलाज आसान हो जाता है।
सुरक्षा और मानकों को लेकर SFDA हमेशा सतर्क रहता है। पिछले कुछ महीनों में प्रशासन ने कई कड़े कदम उठाए हैं। उदाहरण के तौर पर, 22 जून 2026 को SFDA ने डेक्सकॉम (Dexcom) के कुछ कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरणों में तकनीकी खराबी आने पर उन्हें बाजार से वापस मंगाने का आदेश दिया था ताकि मरीजों को सही समय पर ऑडियो अलर्ट मिल सके। इसके अलावा, 3 अगस्त 2026 को ब्लड ग्लूकोज मीटर के एक मॉडल को लेकर भी चेतावनी जारी की गई थी, जो सही से alarma नहीं बजाते थे। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए नई डिवाइस को हरी झंडी मिलना मरीजों की सुरक्षा और बेहतर मेडिकल फॉलो-अप की दिशा में एक जरूरी कदम माना जा रहा है।