सऊदी अरब ने इस साल की हज यात्रा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शेख अब्दुलरहमन अल-सुदैस ने बताया कि अराफ़त के खुतबे का अनुवाद 35 भाषाओं में किया जाएगा। इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और चैनलों के ज़रिए दुनिया भर के मुसलमानों तक पहुँचाया जाएगा ताकि वे इस्लाम के शांति और उदारता के संदेश को अपनी भाषा में समझ सकें।

अराफ़त खुतबा कब होगा और इसे कौन पढ़ेगा?

हज 2026 के लिए अराफ़त का खुतबा 26 मई 2026 को दिया जाएगा, जो कि इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से 9 ज़ुल-हिज्जा 1447 हिजरी है। सऊदी रॉयल कोर्ट ने इस बार मस्जिद नामिरा से खुतबा देने के लिए शेख डॉ. अली बिन अब्दुलरहमन अल-हुदैफी को नियुक्त किया है।

किन भाषाओं में होगा अनुवाद और कैसे मिलेगी जानकारी?

इस बार खुतबे को कुल 35 भाषाओं में ट्रांसलेट किया जाएगा, जिसमें हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, इंडोनेशियाई, फ्रेंच, तुर्की और चीनी जैसी मुख्य भाषाएं शामिल हैं। हज यात्रियों और दुनिया भर के लोगों की सुविधा के लिए ये इंतज़ाम किए गए हैं:

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और सरकारी चैनलों पर इसका ब्रॉडकास्ट होगा।
  • QR कोड का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे लोग अपनी पसंद की भाषा में ऑडियो या टेक्स्ट एक्सेस कर सकेंगे।
  • अनुवाद की क्वालिटी बनाए रखने के लिए प्रेसीडेंसी ऑफ रिलिजियस अफेयर्स ने एक स्पेशल कमेटी बनाई है।

इस पहल का मुख्य मकसद क्या है?

सऊदी सरकार की इस कोशिश का मकसद इस्लाम के उदार और मध्यम मार्ग के संदेश को दुनिया तक पहुँचाना है। इससे उन लाखों हज यात्रियों को मदद मिलेगी जिन्हें अरबी भाषा नहीं आती। अब गैर-अरबी बोलने वाले मुसलमान भी खुतबे के आध्यात्मिक संदेशों को अपनी मातृभाषा में सुनकर उसका लाभ उठा सकेंगे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अराफ़त खुतबा किस तारीख को दिया जाएगा?

हज 2026 के लिए अराफ़त का खुतबा 26 मई 2026 (9 ज़ुल-हिज्जा 1447 AH) को दिया जाएगा।

क्या भारतीय हज यात्री इसे अपनी भाषा में सुन पाएंगे?

हाँ, अनुवाद की जाने वाली 35 भाषाओं की लिस्ट में हिंदी और उर्दू दोनों शामिल हैं। यात्री QR कोड और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए इसे सुन सकेंगे।