Saudi Arabia पर ड्रोन अटैक, जिजान प्रांत में सऊदी अरामको की रिफाइनरी में लगी आग, हूती विद्रोहियों ने ली हमले की जिम्मेदारी

Nura Basta15 August 20263 min read132 viewsSaudi
Saudi Arabia पर ड्रोन अटैक, जिजान प्रांत में सऊदी अरामको की रिफाइनरी में लगी आग, हूती विद्रोहियों ने ली हमले की जिम्मेदारी

सऊदी अरब के जिजान प्रांत में स्थित दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में से एक सऊदी अरामको की रिफाइनरी पर बड़ा हमला हुआ है। यमन के हूती (अंसार अल्लाह) संगठन ने इस हमले की पूरी जिम्मेदारी ली है और कहा है कि यह कदम यमन के सादा और हज्जा प्रांतों पर हुए ड्रोन हमलों के जवाब में उठाया गया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई है।

अल मसीराह टीवी और टेलीग्राम पर आया आधिकारिक बयान

लेबनान की राजधानी बेरूत से चलने वाले हूती के अपने अल मसीराह टीवी पर एक आधिकारिक बयान जारी किया गया। इसमें साफ कहा गया कि यमन में सक्रिय हूती लड़ाकों ने इस रिफाइनरी को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया है। इसके अलावा, हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने टेलीग्राम पर एक संदेश जारी कर बताया कि विद्रोहियों ने सटीक निशाना लगाकर सऊदी अरामको रिफाइनरी को हिट किया है। यह हमला ठीक उस समय सामने आया जब पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच शुक्रवार को मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

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सऊदी ऊर्जा मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

हूती के जिम्मेदारी लेने से कुछ घंटे पहले सऊदी ऊर्जा मंत्रालय की तरफ से बयान जारी किया गया था। मंत्रालय ने बताया कि लाल सागर के जिजान बंदरगाह में स्थित सऊदी अरामको रिफाइनरी की एक सुविधा में सुबह अचानक आग लग गई थी, जिसे वहां मौजूद अग्निशमन कर्मियों ने तुरंत बुझा दिया। इस घटना के तुरंत बाद इजराइल के चैनल 14 ने भी अपने समाचार प्रसारण में यह पुष्टि की थी कि इस हमले के पीछे हूती विद्रोहियों का ही हाथ है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हूती के इन लगातार हमलों की कड़ी निंदा की है। सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इस कदम का स्वागत किया है और दुनिया भर के देशों से अपील की है कि वे हूती के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएं ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

सऊदी अरामको कंपनी और उसकी ताकत

आपको बता दें कि सऊदी अरामको सऊदी अरब की सरकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस कंपनी है, जिसे आधिकारिक तौर पर सऊदी अरबियन ऑयल कंपनी कहा जाता है। यह दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली ऊर्जा कंपनियों में गिनी जाती है। इसका मुख्य कार्यालय सऊदी अरब के धाहरान शहर में स्थित है। उत्पादन और तेल भंडार के मामले में यह कंपनी पूरी दुनिया में सबसे आगे है और इसके पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार और उत्पादन तंत्र मौजूद है। इस कंपनी की शुरुआत साल 1933 में अमेरिकी कंपनियों के साथ हुए एक समझौते के आधार पर हुई थी और बाद में 1980 के दशक में सऊदी सरकार ने इसका पूरी तरह से राष्ट्रीयकरण कर दिया था। मौजूदा समय में भारतीय मुद्रा के हिसाब से इस कंपनी का बाजार मूल्य लगभग 162 लाख करोड़ रुपये है।

उत्पादन क्षमता और वैश्विक स्थिति

सऊदी अरामको की बिना रुके अधिकतम तेल उत्पादन क्षमता करीब 12 मिलियन यानी 1.2 करोड़ बैरल प्रतिदिन है। कंपनी बिना किसी अतिरिक्त निवेश के इस स्तर पर पूरा एक साल तक लगातार काम कर सकती है। मौजूदा समय में वैश्विक बाजार की स्थितियों और ओपेक प्लस के समझौतों के कारण इसका वास्तविक कच्चा तेल उत्पादन लगभग 9 मिलियन से 10.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आसपास चल रहा है। अगर इसमें प्राकृतिक गैस और अन्य ऊर्जा उत्पादों को भी मिला दिया जाए, तो कुल उत्पादन करीब 13.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच जाता है। कंपनी के पास भूमिगत तेल का बहुत बड़ा भंडार है जो करीब 267 बिलियन बैरल आंका गया है।

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