हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति पर अपनी गहरी चिंता जताई है और सभी देशों से संयम बरतने की अपील की है. सऊदी अरब चाहता है कि समुद्र में जहाजों की आवाजाही फिर से पहले जैसी सामान्य हो जाए ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा पर बुरा असर न पड़े.

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सऊदी अरब और GCC देशों की मुख्य मांगें क्या हैं?

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने 5 मई 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी किया. इसमें मंत्रालय ने सैन्य तनाव को कम करने और संयम बरतने की बात कही है. सऊदी अरब की मुख्य मांग है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों का रास्ता वैसा ही बहाल किया जाए जैसा 28 फरवरी से पहले था, ताकि सभी जहाज बिना किसी रोक-टोक के सुरक्षित निकल सकें. सऊदी अरब और GCC (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) के नेताओं ने ईरान द्वारा सदस्य देशों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है. सऊदी अरब ने इस संकट को सुलझाने के लिए पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता और अन्य राजनयिक कोशिशों का समर्थन किया है.

अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की क्या स्थिति है?

इस तनाव के बीच अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (Project Freedom) नाम से एक अभियान शुरू किया है, जिसका मकसद जलमार्ग में फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाना है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी जहाजों पर हमला हुआ तो ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने इस अमेरिकी पहल को ‘प्रोजेक्ट डेडलॉक’ कहा है और कहा कि राजनीतिक संकट का हल सैन्य कार्रवाई से नहीं निकल सकता. अमेरिकी नेवी ने जहाजों को ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर जाने की सलाह दी है क्योंकि मुख्य शिपिंग लेन में अभी भी समुद्री बारूदी सुरंगें (sea mines) मौजूद हैं.

क्षेत्र में हुए हमलों का क्या असर हुआ?

ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव का असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ा है. UAE ने जानकारी दी है कि ईरान की ओर से दागी गई 12 बैलिस्टिक मिसाइल, 3 क्रूज मिसाइल और 4 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया, जिससे तीन लोग घायल हुए. वहीं ओमान के बुखा इलाके में एक रिहायशी इमारत पर हमला हुआ, जिसमें दो लोग घायल हो गए. ईरान की तरफ से मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने चेतावनी दी है कि जो भी विदेशी सेना हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में घुसने की कोशिश करेगी, उस पर हमला किया जाएगा. ईरान ने इस मुद्दे पर समझौता करने के लिए एक महीने की समय सीमा भी तय की है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी अरब ने 28 फरवरी की तारीख का जिक्र क्यों किया?

सऊदी अरब के अनुसार, 28 फरवरी वह तारीख थी जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ था और उसके बाद ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को ब्लॉक कर दिया था.

प्रोजेक्ट फ्रीडम (Project Freedom) क्या है?

यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किया गया एक मिशन है, जिसके जरिए हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाया जा रहा है.