सऊदी अरब ने 11 मार्च को अपना फ्लैग डे मनाया। इस मौके पर पूरे देश में जश्न का माहौल रहा और रियाद में एक खास आर्ट एग्जीबिशन भी लगाई गई। इस दिन का मुख्य मकसद देश की एकता, गौरव और राष्ट्रीय पहचान को याद करना है।

‘In Love with Green’ प्रदर्शनी में क्या खास था?

रियाद के King Abdulaziz Public Library में ‘In Love with Green’ नाम की एक आर्ट प्रदर्शनी शुरू की गई। यह आयोजन Saudi Art Association के सहयोग से किया गया था। इस प्रदर्शनी की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • इसमें सऊदी झंडे से प्रेरित 20 शानदार पेंटिंग्स दिखाई गईं।
  • पेंटिंग्स में देश के सांस्कृतिक प्रतीकों और मशहूर निशानों को उकेरा गया था।
  • इस प्रदर्शनी का उद्घाटन लाइब्रेरी के डायरेक्टर जनरल Bandar Al-Mubarak और सऊदी आर्ट एसोसिएशन की चेयर Hanaa Al-Shibly ने किया।

सऊदी फ्लैग डे का इतिहास और नियम क्या हैं?

सऊदी अरब का झंडा देश की ताकत और न्याय का प्रतीक माना जाता है। इससे जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी इस प्रकार है:

  • शाही फरमान: किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद ने 1 मार्च 2023 को शाही फरमान (No. A/303) जारी कर 11 मार्च को फ्लैग डे घोषित किया था।
  • शुरुआत: साल 1937 में किंग अब्दुलअजीज इब्न सऊद ने देश के राष्ट्रीय झंडे को अपनाया था।
  • झंडे की बनावट: झंडे का रंग हरा है, जिस पर सफेद रंग से Thuluth लिपि में कलमा और नीचे एक तलवार बनी हुई है।
  • खास नियम: सऊदी झंडे का दर्जा बहुत ऊंचा है, इसलिए इसे कभी भी आधा नहीं झुकाया जाता।

पूरे देश में कैसे हुआ जश्न?

फ्लैग डे के मौके पर सिर्फ रियाद ही नहीं, बल्कि पूरे सऊदी अरब में रौनक देखी गई। कई शहरों में सरकारी और निजी इमारतों को हरी रोशनी से सजाया गया।

  • तबुक: यहाँ शहर में 7,000 से ज्यादा झंडे लगाए गए।
  • ज़ान: यहाँ 10,000 से अधिक झंडे फहराए गए और Souk Al-Awalin में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
  • अन्य शहर: मक्का और अल-बहा जैसे शहरों में भी सार्वजनिक जगहों को सजाया गया।
  • शिक्षा संस्थान: देश के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों और यूनिवर्सिटीज में भी इस दिन को मनाया गया।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी फ्लैग डे कब मनाया जाता है?

सऊदी फ्लैग डे हर साल 11 मार्च को मनाया जाता है। इसे किंग सलमान के शाही फरमान के बाद आधिकारिक तौर पर मनाया जाने लगा।

सऊदी झंडे की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

सऊदी झंडा हरे रंग का होता है जिस पर कलमा और तलवार बनी होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कभी भी आधा नहीं झुकाया जाता।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.