Saudi Arabia News: सऊदी क्राउन प्रिंस और CENTCOM प्रमुख की जेद्दा में हुई अहम बैठक, समुद्री सुरक्षा को लेकर हुआ बड़ा ऐलान.

सऊदी अरब की राजधानी जेद्दा में गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को एक बड़ी उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी सेंट्रल कमांड CENTCOM के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर आमने-सामने बैठे। दोनों नेताओं के बीच इस अहम मुलाकात का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में तनाव को कम करना और सुरक्षा तथा स्थिरता को बढ़ाना था। इस चर्चा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और मध्य पूर्व की मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर भी विस्तार से बातचीत की गई।
समुद्री गठबंधन का हुआ औपचारिक ऐलान
इसी दिन सऊदी अरब ने एक बहुत बड़े फैसले के तहत एक बहुराष्ट्रीय समुद्री गठबंधन के औपचारिक रूप से शुरू होने की पुष्टि की। इस नए गठबंधन से कुल 13 नए देश आधिकारिक तौर पर जुड़ गए हैं। इस गठबंधन का मुख्य मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करना है। इसके अलावा इसका उद्देश्य बाब अल-मदब जलडमरूमध्य, लाल सागर और अदन की खाड़ी में नौवहन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा करना है।
गठबंधन में शामिल हुए नए देश
जेद्दा में पश्चिमी बेड़े के कमांड में हुई इस तीसरी योजना बैठक में 39 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। शुरुआती दौर में इस फोर्स को बनाने के लिए 15 देशों ने एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए थे। अब जिन 13 देशों ने अपनी घरेलू कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया है और गठबंधन के चार्टर पर हस्ताक्षर करके आधिकारिक रूप से सदस्यता ली है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- बहरीन
- बांग्लादेश
- जिबूती
- मिस्र
- जॉर्डन
- कुवैत
- पाकिस्तान
- कतर
- सोमवार
- सूडान
- तुर्की
- यमन
- कोमोरॉस
नेतृत्व और कमान से जुड़ी खास बातें
इस महत्वपूर्ण बहुराष्ट्रीय गठबंधन की अगुवाई खुद सऊदी अरब करेगा। सऊदी अरब की तरफ से रियर एडमिरल अब्दुल्ला बिन सलम अल-शेहरी को इस गठबंधन का कमांडर नियुक्त किया गया है, जिन्होंने 6 अगस्त 2026 को अपना पद संभाला था। वहीं दूसरी तरफ, गठबंधन के पहले कार्यकाल के लिए पाकिस्तान डिप्टी कमांडर की जिम्मेदारी निभाएगा।
इस संगठन को सुचारू रूप से चलाने के लिए गठबंधन कमांड का एक मुख्यालय भी तय कर दिया गया है। इसके अलावा इसका लोगो भी मंजूर कर लिया गया है और सभी जरूरी संगठनात्मक तथा योजना से जुड़े दस्तावेजों को भी पूरा कर लिया गया है। इस कदम से खाड़ी देशों और समुद्र में आने-जाने वाले जहाजों की सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत हो जाएगी।