सऊदी अरब की सरकार ने खेती-बाड़ी को आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स ने पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय और CGIAR के बीच एक खास समझौते को मंजूरी दे दी है। इस पहल का मुख्य मकसद देश में फूड सिक्योरिटी को मजबूत करना और खेती के नए तरीके लाना है।

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इस समझौते की मुख्य बातें और बजट क्या है?

सऊदी अरब के पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय ने Consultative Group for International Agricultural Research (CGIAR) के साथ यह हाथ मिलाया है। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए मंत्रालय 5 मिलियन डॉलर का फंड देगा। इस समझौते पर मंत्री Eng. Abdulrahman Abdulmohsen Alfadley ने 15 जनवरी 2026 को दस्तखत किए थे, जिसे 12 मई 2026 को कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी। इसका लक्ष्य खेती में इनोवेशन लाना और पर्यावरण को बचाना है।

खेती और सिंचाई में क्या बदलाव आएंगे?

इस पार्टनरशिप के जरिए सऊदी अरब में खेती को बेहतर बनाने के लिए कई काम किए जाएंगे। इसमें मुख्य रूप से इन चीजों पर ध्यान दिया जाएगा:

  • पानी का सही इस्तेमाल: पानी के टिकाऊ प्रबंधन पर वैज्ञानिक स्टडी की जाएगी।
  • फसलों में सुधार: फसलों की क्वालिटी बढ़ाने के लिए एक टेक्निकल रोडमैप तैयार होगा।
  • डिजिटल टूल्स: सिंचाई की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल होगा।
  • प्लांट जीन बैंक: सऊदी के प्लांट जीन बैंक को मजबूत किया जाएगा ताकि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग हो सके।
  • ग्लोबल एक्सपर्ट्स: खेती और फूड सिक्योरिटी के क्षेत्र में दुनिया भर के एक्सपर्ट्स और सलाहकारों की मदद ली जाएगी।

इस पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी ICARDA (International Center for Agricultural Research in the Dry Areas) की होगी। यह संस्था सूखे इलाकों में खेती के रिसर्च के लिए दुनिया भर में जानी जाती है और सऊदी में इसे लागू करेगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

इस कृषि परियोजना के लिए कितना बजट तय किया गया है?

सऊदी अरब के पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय ने इस समझौते के लिए 5 मिलियन डॉलर के फंड की प्रतिबद्धता जताई है।

इस प्रोजेक्ट को लागू करने वाली मुख्य संस्था कौन सी है?

CGIAR के अंतर्गत आने वाला केंद्र ICARDA (International Center for Agricultural Research in the Dry Areas) इस समझौते को पूरे सऊदी अरब में लागू करने का नेतृत्व करेगा।