सऊदी अरब ने पेरिस में हुई एक अहम मीटिंग के दौरान एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और काउंटर-टेररिज्म फाइनेंसिंग ट्रस्ट फंड की स्टीयरिंग कमेटी की कमान संभाल ली है। इस बैठक का मुख्य मकसद वित्तीय अपराधों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें करना और नए रणनीतिक फ्रेमवर्क तैयार करना था।
इस बैठक का इस्तेमाल दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग को रोकने के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर किया गया। सऊदी अरब की लीडरशिप में अब यह कमेटी अलग-अलग देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और पैसों की निगरानी करने वाले सिस्टम को और बेहतर बनाने पर काम करेगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी की भूमिका
सऊदी अरब 2019 से FATF (Financial Action Task Force) का पूरा सदस्य है और यह उपलब्धि हासिल करने वाला पहला अरब देश बना था। इसके अलावा, सऊदी अरब IMF के AML/CFT थीमैटिक ट्रस्ट फंड में भी योगदान देने वाले देशों में शामिल है।
देश के भीतर सख्त निगरानी
सऊदी अरब में इस काम के लिए एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग परमानेंट कमेटी (AMLPC) बनाई गई है, जो सऊदी सेंट्रल बैंक (SAMA) के गवर्नर की अध्यक्षता में काम करती है। यह कमेटी देश के नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से अपडेट करने और उन्हें लागू करने का काम करती है।