सऊदी अरब से चीन को होने वाला कच्चे तेल का निर्यात जून 2026 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच सकता है. चीन की बड़ी कंपनियों ने महंगे दाम और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से तेल की खरीद कम कर दी है. इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार में बड़ी हलचल मच गई है और आपूर्ति पर असर दिख रहा है.
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तेल की खरीद में कितनी आई कमी?
केप्लर (Kpler) और रॉयटर्स (Reuters) के आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 में सऊदी अरब चीन को करीब 1 करोड़ बैरल तेल भेजेगा. अगर इसे प्रतिदिन के हिसाब से देखें तो यह लगभग 3.33 लाख बैरल होगा. यह आंकड़ा 2025 के औसत 13.9 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले बहुत कम है. चीन की बड़ी रिफाइनिंग कंपनियां जैसे Sinopec, Sinochem और Rongsheng Petrochemical ने जून के लिए अपने ऑर्डर घटा दिए हैं.
तेल बाजार पर असर और मुख्य कारण
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) काफी हद तक बंद है. इस वजह से तेल का प्रवाह बाधित हुआ है और रिफाइनरों के लिए लागत बढ़ गई है. सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि अगर यह नाकाबंदी जून तक जारी रही, तो बाजार में दिक्कतें 2027 तक रह सकती हैं. सऊदी अरब अब तेल भेजने के लिए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए रेड सी पोर्ट ऑफ यानबू का इस्तेमाल कर रहा है ताकि बाधित मार्ग से बचा जा सके.
| विवरण | डेटा / जानकारी |
|---|---|
| जून 2026 कुल अनुमानित निर्यात | 1 करोड़ बैरल |
| जून 2026 औसत दैनिक निर्यात | 3.33 लाख बैरल |
| 2025 का औसत दैनिक निर्यात | 13.9 लाख बैरल |
| एशिया के लिए नया OSP प्रीमियम | $15.50 प्रति बैरल |
| पिछले महीने का प्रीमियम | $19.50 प्रति बैरल |
| संभावित व्यवधान की अवधि | 2027 तक |
| वैकल्पिक निर्यात मार्ग | ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (यानबू पोर्ट) |
Frequently Asked Questions (FAQs)
चीन ने सऊदी तेल की खरीद क्यों कम की है?
चीनी कंपनियों ने कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिका व ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण खरीद कम की है, जिससे इनपुट लागत बढ़ गई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी का क्या असर होगा?
सऊदी अरामको के अनुसार, यदि यह नाकाबंदी जारी रहती है तो वैश्विक तेल बाजार में व्यवधान 2027 तक बना रह सकता है.
