सऊदी अरब के लिए चीन अब सबसे बड़ा व्यापारिक साथी बन गया है। साल 2026 की पहली तीन महीनों में चीन ने सऊदी अरब से सबसे ज्यादा सामान खरीदा। इस दौरान कुल निर्यात की कीमत 44.8 अरब रियाल तक पहुँच गई।
General Authority for Statistics (GASTAT) के आंकड़ों के मुताबिक चीन सऊदी के एक्सपोर्ट का मुख्य केंद्र रहा। जनवरी में 14.9 अरब रियाल, फरवरी में 13.6 अरब रियाल और मार्च में 16.2 अरब रियाल का सामान चीन भेजा गया। मार्च के महीने में पिछले साल के मुकाबले निर्यात में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
देश की आर्थिक स्थिति की बात करें तो सऊदी अरब की जीडीपी (GDP) में पहली तिमाही में 3 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। साथ ही नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का हिस्सा जनवरी में बढ़कर 40 प्रतिशत हो गया, जो पिछले साल जनवरी में 34.9 प्रतिशत था।
निवेश और समझौतों में बढ़ोतरी
दोनों देशों के बीच रिश्तों में काफी मजबूती आई है। सऊदी अरब के Public Investment Fund (PIF) और चीनी वित्तीय संस्थाओं ने 50 अरब डॉलर के एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग में पेट्रोकेमिकल्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। साल 2024 में चीन का सऊदी अरब में निवेश लगभग 30 प्रतिशत बढ़कर 8.2 अरब डॉलर हो गया था।
ताज़ा व्यापारिक बदलाव
अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, चीन से सऊदी आने वाले सामान में 34.1 प्रतिशत की कमी आई, जबकि सऊदी से चीन जाने वाले सामान में 27.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, जून 2026 में चीन को होने वाले कच्चे तेल के निर्यात में कमी आने का अनुमान है। यह घटकर 13 से 14 मिलियन बैरल तक आ सकता है।
इसकी मुख्य वजह Aramco द्वारा तय की गई कीमतें हैं, जो अन्य खाड़ी देशों के मुकाबले ज्यादा हैं। इसी कारण चीन और भारत जैसे एशियाई खरीदार अब रूस और ईरान से सस्ता तेल खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे सऊदी अरब की मार्केट हिस्सेदारी पर असर पड़ रहा है।
व्यापारिक आंकड़ों की सूची
| विवरण | आंकड़े (2026) |
|---|---|
| जनवरी एक्सपोर्ट | 14.9 अरब रियाल |
| फरवरी एक्सपोर्ट | 13.6 अरब रियाल |
| मार्च एक्सपोर्ट | 16.2 अरब रियाल |
| पहली तिमाही कुल एक्सपोर्ट | 44.8 अरब रियाल |
| Q1 जीडीपी ग्रोथ | 3.0% |
| नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट अनुपात (जनवरी) | 40.0% |
| चीन एक्सपोर्ट हिस्सेदारी (अप्रैल) | 15.2% |
