अमेरिका की खुफिया एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि मार्च के महीने में सऊदी अरब और इराक में CIA के ठिकानों पर हुए ड्रोन हमलों के पीछे रूस का क्या हाथ है। 23 जुलाई 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, ये हमले बेहद सटीक थे, जिसके बाद यह शक गहरा गया है कि ईरान को इन हमलों के लिए रूस से मदद मिली थी। रियाद में अमेरिकी दूतावास के भीतर मौजूद CIA के एक केंद्र को भी निशाना बनाया गया था।
रूसी तकनीक का इस्तेमाल होने का अंदेशा
अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में Shahed-136 ड्रोन का इस्तेमाल हुआ था। ऐसी जानकारी मिल रही है कि रूस ने ईरान को Kometa-M नाम का सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम दिया है, जिसकी वजह से ये ड्रोन ज्यादा सटीक हो गए हैं और इन्हें जाम करना भी मुश्किल है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि रूस और ईरान दोनों ही मिलकर मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रभाव को कम करना चाहते हैं।
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचने की बात नहीं कही है और CIA की तरफ से भी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जांचकर्ता इस पहलू पर भी गौर कर रहे हैं कि क्या रियाद स्थित CIA का कार्यालय गलती से उस हमले की जद में आ गया था जो दूतावास को निशाना बनाकर किया गया था। जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हुए हालिया मिसाइल हमले के बाद से इस तरह की विदेशी सहायता को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
