Saudi Arabia: कोलंबिया के फैसले पर सऊदी अरब का कड़ा रुख, गोलान हाइट्स की मान्यता को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन.

सऊदी अरब ने कोलंबिया द्वारा इजरायली संप्रभुता को मान्यता दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार दिया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को यह स्पष्ट किया कि कोलंबिया का यह कदम सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 497 (1981) के खिलाफ है। सऊदी सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में यह बात कही है कि इस तरह के फैसलों से क्षेत्र में शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचता है और क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ती है।
कोलंबिया के राष्ट्रपति का फैसला और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
कोलंबिया के नए दक्षिणपंथी राष्ट्रपति अबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को गोलान हाइट्स पर इजरायल के अधिकार को आधिकारिक रूप से मान्यता दी थी। कोलंबियाई सरकार ने अपने बयान में तर्क दिया कि वह इस क्षेत्र पर इजरायल की संप्रभुता और बाहरी खतरों से खुद की रक्षा करने के अधिकार का समर्थन करती है। इस फैसले के बाद इजरायल के विदेश मंत्री गिदेव साआर ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया और कहा कि मजबूत सीमाएं यहूदी लोगों के अस्तित्व के लिए बहुत जरूरी हैं। वहीं दूसरी तरफ, सीरिया के विदेश मंत्रालय ने इस फैसले को सिरे से खारिज करते हुए गोलान हाइट्स को सीरियाई भूमि का अभिन्न हिस्सा बताया है।
सऊदी अरब की पुरानी और स्पष्ट नीति
सऊदी अरब ने एक बार फिर दोहराया है कि गोलान हाइट्स पूरी तरह से सीरियाई अरब की भूमि है और इस क्षेत्र की कानूनी स्थिति को बदलने का कोई भी प्रयास कानूनी रूप से वैध नहीं माना जाएगा। सऊदी सरकार ने कोलंबिया से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है ताकि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया जा सके। संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार भी गोलान हाइट्स 1967 के युद्ध के बाद से इजरायली सैन्य कब्जे के अधीन है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 497 इजरायल के एकतरफा कब्जे को पूरी तरह से अवैध और निष्प्रभावी घोषित करता है। दुनिया भर में अब तक केवल अमेरिका ने 2019 में और अब कोलंबिया ने इजरायल के इस दावे को आधिकारिक रूप से मान्यता दी है।