सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने 1 जून 2026 को कुवैत पर हुए ईरान के लगातार हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि वह कुवैत की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए उसके हर फैसले के साथ पूरी तरह खड़ा है। कुवैत की सीमा में ईरानी ड्रोन और मिसाइल घुसने के बाद खाड़ी देशों में तनाव काफी बढ़ गया है और इस पर सऊदी अरब ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

ईरान ने कुवैत पर कैसे और कब किया हमला?

कुवैत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 1 जून 2026 को सुबह के समय कुछ दुश्मनों के ड्रोन उनके हवाई क्षेत्र में घुस आए थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने तुरंत ट्रैक किया। इससे पहले 30 मई 2026 को कुवैत के अली अल-सालेम एयर बेस पर एक मिसाइल हमला हुआ था, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात थे। इस हमले में अमेरिकी ड्रोन को नुकसान पहुंचा था और कुछ सैनिकों को मामूली चोटें आई थीं। यह घुसपैठ 8 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष विराम के बाद पहला बड़ा उल्लंघन माना जा रहा है।

सऊदी अरब और कुवैत के अधिकारियों का क्या कहना है?

  • कुवैत का आधिकारिक बयान: कुवैत के विदेश मंत्रालय ने 1 जून 2026 को कहा कि वह इन हमलों के लिए पूरी तरह से ईरान को जिम्मेदार मानता है और अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार रखता है।
  • सऊदी अरब का समर्थन: सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कुवैत, कतर और यूएई के क्षेत्रों पर होने वाले ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की है और इन खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए पूरा समर्थन देने की बात दोहराई है।
  • यूएई की प्रतिक्रिया: यूनाइटेड अरब अमीरात ने भी 31 मई 2026 को कुवैत पर हुए ड्रोन घुसपैठ की घटना को एक बड़ी उकसावे वाली कार्रवाई बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

कुवैत पर ईरान का हमला कब हुआ और क्या नुकसान हुआ?

कुवैत पर 1 जून 2026 की सुबह ड्रोन घुसपैठ हुई थी और इससे पहले 30 मई 2026 को अली अल-सालेम एयर बेस पर मिसाइल हमला हुआ था, जिससे अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ड्रोन को नुकसान पहुंचा था।

इस हमले पर सऊदी अरब का क्या रुख है?

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने 1 जून 2026 को बयान जारी कर इन हमलों की कड़ी निंदा की है और कुवैत की सुरक्षा तथा संप्रभुता की रक्षा के लिए अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है।