सऊदी अरब ने मस्जिद अल-अक्सा में इसराइली अधिकारियों की उकसावे वाली हरकतों पर कड़ा विरोध जताया है। 14 मई 2026 को एक इसराइली मंत्री ने पुलिस की सुरक्षा में मस्जिद के अंदर घुसकर इसराइल का झंडा फहराया। इस घटना के बाद पूरी दुनिया के मुसलमानों में गुस्सा है और सऊदी सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है।

सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देशों ने क्या कहा?

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने कहा कि इसराइली अधिकारियों की यह हरकत इस्लामी पवित्र स्थलों की गरिमा पर हमला है। सऊदी अरब के साथ-साथ जॉर्डन, UAE, कतर, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की ने भी एक साझा बयान जारी किया। इन देशों ने स्पष्ट किया कि मस्जिद अल-अक्सा में इस तरह के काम अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हैं और इसे किसी भी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मस्जिद अल-अक्सा में असल में क्या हुआ था?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir भारी पुलिस सुरक्षा के बीच मस्जिद परिसर में घुसे और वहां इसराइली झंडा फहराया। इस दौरान वहां कई अन्य इसराइली बसने वाले भी पहुंचे और धार्मिक रस्में निभाईं। इस घटना को अंजाम देने के लिए इसराइली पुलिस ने कड़े इंतजाम किए थे।

  • प्रवेश पर रोक: 60 साल से कम उम्र के पुरुषों और 50 साल से कम उम्र की महिलाओं को मस्जिद में घुसने से रोका गया।
  • dispositif पुलिस कार्रवाई: फलास्तीनी उपासकों के साथ बदसलूकी की खबरें आईं ताकि इसराइली अधिकारियों का रास्ता साफ रहे।
  • फ्लैग मार्च: हजारों की संख्या में इसराइली लोग पुराने शहर के दमिश्क गेट पर झंडा मार्च निकालते हुए देखे गए।

Frequently Asked Questions (FAQs)

मस्जिद अल-अक्सा में किसराइल ने क्या किया?

14 मई 2026 को इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने पुलिस सुरक्षा में मस्जिद परिसर में प्रवेश किया और वहां इसराइली झंडा फहराया।

इस घटना पर सऊदी अरब का क्या स्टैंड है?

सऊदी विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसराइली हमलों को रोकने की अपील की है।