सऊदी अरब ने फिलिस्तीन और लेबनान पर हो रहे इसराइली हमलों की कड़ी निंदा की है। साथ ही, सऊदी ने ईरान द्वारा आम नागरिकों और सरकारी इमारतों पर किए गए हमलों को भी गलत बताया है। सऊदी अरब अब अपनी सुरक्षा को लेकर काफी सख्त हो गया है और क्षेत्र में शांति के लिए कुछ बड़ी शर्तें रखी हैं।
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सऊदी अरब की शांति के लिए क्या हैं शर्तें?
संयुक्त राष्ट्र में सऊदी अरब के प्रतिनिधि Dr. Abdulaziz bin Muhammad Al-Wasel ने साफ किया कि शांति के लिए कुछ चीजों का होना जरूरी है। सऊदी सरकार का कहना है कि जब तक गाजा से सेना वापस नहीं होगी और 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश नहीं बनेगा, तब तक शांति नहीं आ सकती। सऊदी ने यह भी कहा कि यरूशलेम में पवित्र स्थलों की स्थिति बदलना और गैरकानूनी बस्तियां बसाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
ईरान के हमलों के बाद GCC देशों ने क्या फैसला लिया?
28 अप्रैल 2026 को सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman की अध्यक्षता में GCC देशों के नेताओं ने बैठक की। इसमें ईरान द्वारा जॉर्डन और GCC देशों के नागरिक इलाकों पर किए गए हमलों की निंदा की गई। इन हमलों की वजह से अब GCC देशों ने Maximum Readiness यानी पूरी तैयारी का मोड अपना लिया है। सऊदी अरब का मानना है कि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन है और वह अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
क्या सऊदी अरब इसराइल के साथ रिश्ते सुधारने वाला है?
क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक फिलिस्तीन देश बनाने का कोई ठोस रास्ता नहीं निकलता, तब तक सऊदी अरब इसराइल के साथ रिश्तों को सामान्य नहीं करेगा। इसके अलावा, सऊदी विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan ने लेबनान की स्थिरता के लिए अपना समर्थन दिया है और वहां हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सऊदी अरब ने शांति के लिए क्या शर्तें रखी हैं?
सऊदी अरब ने गाजा से सेना की वापसी, युद्धविराम और 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना की मांग की है।
ईरान के हमलों पर सऊदी अरब और GCC देशों का क्या रुख है?
GCC देशों ने ईरान के नागरिक हमलों की कड़ी निंदा की है और अब Maximum Readiness की स्थिति में हैं ताकि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।