सऊदी अरब ने सीरियाई जमीन पर इसराइल की सैन्य कार्रवाई और गोलाबारी की कड़ी निंदा की है. सऊदी सरकार ने साफ तौर पर कहा कि इसराइल को सीरियाई इलाकों से बिना किसी शर्त के तुरंत बाहर निकलना चाहिए. सऊदी अरब ने इस हमले को पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बताया है.

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विदेश मंत्रालय ने जताई नाराजगी

सऊदी विदेश मंत्रालय ने मार्च 20-21, 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर दक्षिणी सीरिया में सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की. मंत्रालय ने बताया कि इन सैन्य ऑपरेशन्स के दौरान Quneitra और Daraa गवर्नरेट्स को निशाना बनाया गया, जहाँ भारी गोलाबारी की गई.

सऊदी अरब ने इन कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून और सीरिया की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया. साथ ही, इसे 1974 के Disengagement Agreement की शर्तों को तोड़ने जैसा कहा. रियाद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप करने और इसराइल की इन हरकतों को रोकने की अपील की है.

संयुक्त राष्ट्र में सऊदी की चेतावनी

22 जून 2026 को UN Security Council में सऊदी अरब के प्रतिनिधि ने अरब देशों की तरफ से अपनी बात रखी. उन्होंने स्पष्ट किया कि इसराइल की आक्रामक कार्रवाई इस पूरे इलाके में अस्थिरता पैदा करने वाला सबसे मुख्य कारण है. प्रतिनिधि ने माँग की कि इसराइल तुरंत सीरियाई क्षेत्रों से अपनी सेना हटा ले.

क्या था पूरा मामला

मिली जानकारियों के मुताबिक, इसराइली सेना ने Quneitra के Ain al-Eid और Ain al-Ziwan जैसे गाँवों में छापेमारी की. वहाँ चेकपोस्ट बनाए गए, घरों की तलाशी ली गई और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया. इस दौरान दक्षिणी सीरिया में दो लोगों की मौत हुई और Daraa के Abidin इलाके में हेलीकॉप्टर मशीन गन और आर्टिलरी शेल्स का इस्तेमाल किया गया.

वहीं दूसरी ओर, इसराइल ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए दावा किया कि ये हमले Sweida प्रांत में Druze समुदाय पर हुए कथित हमलों के जवाब में किए गए थे.