इजरायल की संसद द्वारा फिलिस्तीनी कैदियों को मौत की सजा देने वाले नए कानून को मंजूरी मिलने के बाद सऊदी अरब समेत सात अरब और इस्लामी देशों ने इसकी कड़ी आलोचना की है। 2 अप्रैल 2026 को जारी एक साझा बयान में इन देशों ने इस कानून को अंतरराष्ट्रीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। सऊदी अरब ने चेतावनी दी है कि इजरायल के इस तरह के कदम रंगभेद की व्यवस्था को और अधिक बढ़ावा देंगे। यह कानून विशेष रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले फिलिस्तीनियों के लिए बनाया गया है।

🚨: UK Travel Advisory: ब्रिटेन ने कुवैत की यात्रा को लेकर दी चेतावनी, क्षेत्रीय तनाव के बीच सुरक्षा का खतरा बढ़ा

इजरायल के इस नए कानून में क्या प्रावधान शामिल हैं?

इजरायल की संसद ने 30 मार्च 2026 को इस विवादित कानून को तीसरे और अंतिम रीडिंग में पास किया था। यह कानून इजरायली सैन्य अदालतों को यह अधिकार देता है कि वे फिलिस्तीनी कैदियों को फांसी की सजा सुना सकें।

  • दोषी ठहराए जाने के 90 दिनों के भीतर फांसी की सजा को पूरा करना अनिवार्य होगा।
  • इस कानून में सजा पाने वाले व्यक्ति के लिए किसी भी प्रकार की माफी का कोई रास्ता नहीं छोड़ा गया है।
  • मौत की सजा सुनाने के लिए जजों के बहुमत की जरूरत होगी, जजों का एकमत होना जरूरी नहीं है।
  • यह कानून केवल उन फिलिस्तीनियों पर लागू होगा जो कब्जे वाले इलाकों में रहते हैं।
  • इजरायली नागरिकों पर समान अपराध के लिए यह कानून लागू नहीं किया जाएगा।

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और देशों की इस पर क्या राय है?

इस कानून के पारित होने के बाद दुनिया भर के कई संगठनों ने नाराजगी व्यक्त की है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने इसे मानवता के खिलाफ बताया है। इस संबंध में विभिन्न देशों और निकायों की राय इस प्रकार है:

संस्था का नाम दी गई प्रतिक्रिया
OIC इसे राजनीतिक हत्याओं के लिए दिया गया कानूनी लाइसेंस बताया।
GCC महासचिव इसे अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन कहा।
जॉर्डन सरकार कानून को नस्लवादी, भेदभावपूर्ण और अवैध करार दिया।
अल-अजहर (मिस्र) इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों की हत्या को वैध बनाने के प्रयासों को खारिज किया।
B’Tselem इसे फिलिस्तीनियों के अमानवीयकरण का एक नया निचला स्तर बताया।

रिपोर्ट्स के अनुसार इजरायल की जेल सेवा ने फांसी के लिए विशेष रूप से निर्धारित सुविधाओं को तैयार करना शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी ओर गाजा में इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं। कई जानकारों का मानना है कि इस कानून से क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ सकता है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.