सऊदी अरब में बड़ी-बड़ी Consulting कंपनियों के लिए अब पुराने दिन लद गए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब केवल कागजी सलाह या ‘विजन’ देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर काम करके दिखाना होगा। Public Investment Fund (PIF) और वित्त मंत्रालय ने खर्च को लेकर कड़े नियम लागू कर दिए हैं, जिसके चलते Consulting मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

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Consulting सेक्टर में आई गिरावट, 50% तक घट गई फीस

सऊदी अरब का Consulting बाजार अब पहले जैसी तेजी नहीं दिखा रहा है। 2022 में जहां इस सेक्टर में 38% की बढ़ोतरी हुई थी, वहीं 2025 तक यह घटकर महज 13% रह जाने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, काम पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के बीच ‘प्राइस वॉर’ छिड़ गई है और कुछ फर्में अपनी फीस में 50% तक की कटौती कर रही हैं।

  • वित्त मंत्रालय ने 2025 के बजट में ‘खर्च में कुशलता’ पर जोर दिया है, यानी अब पानी की तरह पैसा नहीं बहाया जाएगा।
  • अब सरकार उन कंपनियों को तरजीह दे रही है जो प्रोजेक्ट को पूरा करने (Execution) की क्षमता रखती हैं।
  • पहले की तरह अब ‘ऑटोमैटिक डिमांड’ का दौर खत्म हो गया है, हर प्रोजेक्ट के लिए कड़ी जांच हो रही है।

PwC से हटा एक साल पुराना बैन, लेकिन शर्तें हैं सख्त

खबर है कि PIF ने दुनिया की बड़ी Consulting फर्म PwC पर लगा एक साल पुराना बैन हटा दिया है। 26-27 जनवरी 2026 के आसपास इस फैसले के बाद PwC अब दोबारा सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगा सकेगी। हालांकि, इसके साथ ही सरकार ने ‘Saudization’ यानी स्थानीय लोगों को नौकरी देने के नियम को बहुत सख्त कर दिया है।

मार्च 2024 से लागू नियम के तहत Consulting फर्मों को अपने स्टाफ में कम से कम 40% सऊदी नागरिकों को रखना अनिवार्य है। इसके अलावा, जिन कंपनियों का रीजनल हेडक्वार्टर (RHQ) सऊदी अरब में नहीं है, उन्हें सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिलने में मुश्किल हो रही है।

Mukaab जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर लगा ब्रेक, निजीकरण पर जोर

सऊदी अरब के बड़े प्रोजेक्ट्स की रफ्तार भी थोड़ी धीमी हुई है। हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि रियाद में बन रहे विशाल ‘Mukaab’ का निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया गया है ताकि इसकी फंडिंग और व्यावहारिकता की जांच की जा सके। NEOM में भी छंटनी और प्रोजेक्ट्स की समीक्षा के लिए एक नई यूनिट बनाई गई है।

दूसरी तरफ, 29 जनवरी 2026 से ‘नेशनल प्राइवेटाइजेशन स्ट्रैटेजी’ का नया चरण शुरू हो गया है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक प्राइवेट सेक्टर से करीब 64 अरब डॉलर (240 अरब रियाल) का निवेश आए। अब फोकस केवल 2030 एक्सपो और फीफा 2034 जैसे बड़े आयोजनों से जुड़े जरूरी कामों पर ही है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.