29 जुलाई 2026 को खाड़ी देशों के संगठन GCC ने सऊदी अरब के साथ पूरी एकजुटता दिखाई है। इराक में मौजूद ईरान समर्थक मिलिशिया द्वारा सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की गई है। GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है। ये हमले 27 और 28 जुलाई को हुए ड्रोन हमलों के बाद शुरू हुए थे।
ℹ️: Kuwait News: कुवैत ने 25 लोगों की नागरिकता की रद्द, प्रमुख शिया धर्मगुरु का भी नाम शामिल।
सऊदी अरब और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई
सऊदी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सऊदी सशस्त्र बलों ने अमेरिकी CENTCOM के साथ मिलकर इराक के पूर्वी हिस्से में स्थित आतंकी लॉजिस्टिक्स और हथियारों के ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी CENTCOM के अनुसार, यह कदम पिछले 72 घंटों में ईरान के IRGC द्वारा किए गए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में उठाया गया है। सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का उपयोग करते हुए यह कदम उठाया है।
हमले का असर और बढ़ता तनाव
रिपोर्टों के मुताबिक, इस जवाबी कार्रवाई में इराक के Popular Mobilization Forces (PMF) के कम से कम 20 लड़ाके मारे गए हैं और 32 लोग घायल हुए हैं। इराक के प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने इन हमलों की जांच के आदेश दिए हैं, हालांकि इराकी मिलिशिया ने ड्रोन हमलों में शामिल होने से इनकार किया है। क्षेत्र में तनाव तब और बढ़ गया जब जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई 5 मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया। ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य केंद्रों को निशाना बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों को रोकने का दावा भी किया है। कुवैत, बहरीन, कतर, ओमान और यूएई ने भी सऊदी अरब पर हुए इन हमलों की निंदा की है।
