सऊदी अरब पर पिछले कुछ दिनों में लगातार हो रहे ड्रोन हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में हलचल मचा दी है। इन हमलों के बाद अरब लीग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। 28 जुलाई 2026 को सऊदी के पूर्वी प्रांत और रियाद में तेल सुविधाओं को निशाना बनाकर कई ड्रोन हमले किए गए, जिन्हें सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक हवा में ही नाकाम कर दिया। यह घटना बीते दो दिनों में दूसरी बार हुई है।
सऊदी और अमेरिकी सेना का संयुक्त एक्शन
GCC महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने इन हमलों को सऊदी संप्रभुता का उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है। इन हमलों का जवाब देते हुए 29 जुलाई 2026 की सुबह सऊदी सशस्त्र बलों ने अमेरिकी CENTCOM के साथ मिलकर इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर सटीक हमले किए। CENTCOM ने पुष्टि की कि यह कार्रवाई पिछले 72 घंटों में हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में की गई है। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह केवल अपनी सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा के तहत ये कदम उठा रहा है।
क्षेत्रीय देशों का समर्थन और ईरान का रुख
सऊदी अरब के साथ एकजुटता दिखाते हुए मिस्र, कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान सहित कई अरब देशों और संगठनों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। वहीं, ईरान के सैन्य अधिकारियों ने इन हमलों में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है और इसे गलत बताया है। इसके अलावा, यमन के Houthis ने भी रेड सी में एक सऊदी तेल टैंकर पर हमले की जिम्मेदारी ली है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है। इराक ने इस संयुक्त सैन्य कार्रवाई पर अपनी आपत्ति जताते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है।
