सऊदी अरब ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश को संयुक्त राष्ट्र की अंतरिक्ष समिति (COPUOS) का फर्स्ट वाइस-चेयर चुना गया है। अब सऊदी अरब दुनिया भर में अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल और उसके नियमों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

वियना में 10 जून से 19 जून 2026 तक संयुक्त राष्ट्र की इस समिति का 69वां सत्र चला। इस बैठक के दौरान सऊदी अरब ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी तरक्की के बारे में दुनिया को विस्तार से बताया। सऊदी स्पेस एजेंसी की जनरल मैनेजर Muryah Al-Shahrani अब फर्स्ट वाइस-चेयर के तौर पर सऊदी अरब का प्रतिनिधित्व करेंगी।

काम करने के तरीकों में बदलाव की मांग

सऊदी अरब ने इस बैठक में सुझाव दिया कि संयुक्त राष्ट्र की इस समिति के काम करने के तरीकों को विकसित करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष की दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है, इसलिए समिति के सिस्टम को भी आधुनिक बनाना चाहिए ताकि वह ज़्यादा असरदार तरीके से काम कर सके।

अंतरिक्ष समझौतों पर ज़ोर

बता दें कि सऊदी स्पेस एजेंसी और संयुक्त राष्ट्र के बाहरी अंतरिक्ष मामलों के कार्यालय (UNOOSA) के बीच 25 जनवरी 2026 को एक समझौता हुआ था। इस समझौते का मुख्य मकसद अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए एक साझा ढांचा तैयार करना और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है।

इस सत्र के दौरान कुछ मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की गई:

  • अंतरिक्ष गतिविधियों को लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ बनाए रखना।
  • Space 2030 प्लान को लागू करना।
  • अंतरिक्ष के नियमों और कानूनों को मज़बूत करना ताकि सभी देश मिलकर काम कर सकें।

सऊदी अधिकारियों ने कहा कि इस चुनाव से यह साफ़ होता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी अरब के अंतरिक्ष प्रयासों पर भरोसा बढ़ा है। फर्स्ट वाइस-चेयर की भूमिका में सऊदी अरब सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्पेस गवर्नेंस को बेहतर करने में मदद करेगा।