सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। संयुक्त राष्ट्र ने विज्ञान और तकनीक को विकास के लिए इस्तेमाल करने वाली एक खास कमेटी में सऊदी अरब को सर्वसम्मति से चुन लिया है। अब साल 2027 से 2030 तक सऊदी अरब दुनिया भर में तकनीक और विज्ञान की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
सऊदी अरब का चुनाव कैसे हुआ और कितनी अवधि के लिए है?
9 मई 2026 को संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) के सदस्यों ने सऊदी अरब को इस महत्वपूर्ण कमेटी के लिए चुना। इस कमेटी का नाम ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र आयोग’ (CSTD) है। सऊदी अरब की सदस्यता साल 2027 से शुरू होकर 2030 तक रहेगी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए सऊदी अरब के संचार, अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी आयोग ने विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम किया।
इस सदस्यता से सऊदी अरब और दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
इस चुनाव के बाद सऊदी अरब अब विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन से जुड़ी वैश्विक नीतियों को बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। المملكة अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा गवर्नेंस और नई उभरती तकनीकों जैसे बड़े मुद्दों पर दुनिया को रास्ता दिखाएगा। साथ ही, वह डिजिटल ग्लोबल कॉम्पैक्ट (GDC) और वर्ल्ड समिट ऑन इंफॉर्मेशन सोसाइटी (WSIS) के लक्ष्यों को जमीन पर उतारने में मदद करेगा। यह कदम सऊदी अरब को एक डिजिटल लीडर के रूप में और मजबूत करेगा।
क्या है यह CSTD कमेटी और इसका मुख्य काम क्या है?
- CSTD की स्थापना साल 1992 में हुई थी और इसमें दुनिया के 43 देश सदस्य हैं।
- यह कमेटी संयुक्त राष्ट्र महासभा और ECOSOC को विज्ञान और तकनीक के असर के बारे में सलाह देती है।
- इसका मुख्य काम विकासशील देशों के लिए नई नीतियां बनाना और तकनीक को बढ़ावा देना है।
- सऊदी अरब पहले साल 2022 में इस कमेटी के 25वें सत्र का अध्यक्ष भी रह चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका भरोसा बढ़ा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सऊदी अरब इस कमेटी में कब से सदस्य बनेगा?
सऊदी अरब साल 2027 से 2030 तक इस संयुक्त राष्ट्र कमेटी का सदस्य रहेगा।
CSTD कमेटी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह कमेटी विज्ञान और तकनीक का उपयोग विकास के लिए करने के लिए नीतियां बनाती है और संयुक्त राष्ट्र को सलाह देती है।