सऊदी अरब के काउंसिल ऑफ सीनियर स्कॉलर्स के सदस्य और मुफ्ती शेख सालेह अल-फौजान ने एक नया फतवा जारी किया है। यह जानकारी उन सभी के लिए बहुत जरूरी है जब ईद का दिन शुक्रवार को पड़ता है। 16 मार्च 2026 को जारी इस नए आदेश के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सुबह ईद की नमाज पढ़ता है तो उसे दोपहर की जुमे (Jumu’ah) की नमाज में शामिल होने से धार्मिक छूट दी जाएगी। यह फैसला आम नागरिकों और गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों को सहूलियत देने के लिए लिया गया है।

जुमे की नमाज से छूट का क्या है नियम

शेख सालेह अल-फौजान द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक अगर ईद और जुमा एक ही दिन यानी शुक्रवार को आते हैं, तो लोगों को एक खास सहूलियत जिसे रुक्सा कहा जाता है दी जाती है। जिन लोगों ने सुबह ईद की नमाज अदा कर ली है, उनके लिए दोपहर में जुमे की नमाज में जाना जरूरी नहीं होगा। यह फतवा हनबली विचारधारा और सऊदी के सीनियर स्कॉलर्स के नियमों के तहत दिया गया है। हालांकि जुमे की नमाज न पढ़ने की स्थिति में उन्हें अपने तय समय पर दोपहर की Dhuhr की 4 रकात नमाज अनिवार्य रूप से पढ़नी होगी।

मस्जिदों में जारी रहेगी जुमे की नमाज

इस नियम का फायदा आम नमाजियों को मिलेगा लेकिन मस्जिदों में जुमे की नमाज पूरी तरह बंद नहीं होगी। जुमे की नमाज वाली मस्जिदों में इमाम को नमाज पढ़ानी होगी। यह उन लोगों के लिए है जो किसी कारण से सुबह ईद की नमाज नहीं पढ़ पाए थे या जो अपनी मर्जी से जुमे की नमाज में शामिल होना चाहते हैं। सऊदी का इस्लामिक मामलों का मंत्रालय यह सुनिश्चित करेगा कि मस्जिदों में व्यवस्था बनी रहे और जहां जुमा नहीं हो रहा है वहां भी Dhuhr की अजान समय पर दी जाए।

खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर असर

सऊदी अरब में काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह नियम जानना बहुत काम का है। इस बार 20 मार्च 2026 को शुक्रवार के दिन ईद उल-फितर पड़ने की संभावना है। ऐसे में जो प्रवासी सुबह ईद की नमाज पढ़कर काम पर जाते हैं या परिवार के साथ समय बिताते हैं, उन्हें दोपहर में जुमे की नमाज के लिए मस्जिद जाने की पाबंदी से राहत मिलेगी। वे अपनी सुविधा के अनुसार Dhuhr की नमाज अदा कर सकते हैं। यह नियम लोगों को त्योहार के दिन समय के प्रबंधन में बड़ी राहत देता है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.