सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। विज़न 2030 के चलते अब दुनिया भर की बड़ी कंपनियां सऊदी में पैसा लगा रही हैं। 2017 के मुकाबले विदेशी निवेश 5 गुना बढ़ गया है, जो अब 133 अरब रियाल तक पहुंच गया है। इस बदलाव से देश में नए बिजनेस और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
सऊदी अरब में निवेश इतना क्यों बढ़ा और किसने दी जानकारी?
निवेश मंत्री Khalid Al-Falih ने Davos में हुए World Economic Forum 2026 के दौरान बताया कि सऊदी अब दुनिया के लिए निवेश का एक बड़ा केंद्र बन गया है। यह सब विज़न 2030 के तहत शुरू किए गए प्रोग्राम्स की वजह से हुआ है। सरकार ने नियमों को आसान बनाया है ताकि विदेशी कंपनियां आसानी से अपना कारोबार शुरू कर सकें। इसमें MISA, SAMA और GASTAT जैसे सरकारी विभागों की बड़ी भूमिका रही है।
निवेश और आर्थिक विकास से जुड़े मुख्य आंकड़े क्या हैं?
| विवरण | आंकड़ा (2025 तक) |
|---|---|
| विदेशी निवेश (FDI) 2017 में | 28 अरब रियाल |
| विदेशी निवेश (FDI) 2025 में | 133 अरब रियाल |
| कुल FDI स्टॉक | 3.32 ट्रिलियन रियाल |
| कुल FDI प्रवाह (Inflows) | 1 ट्रिलियन रियाल से ज्यादा |
| नेट FDI प्रवाह (2025) | 122.36 अरब रियाल |
| क्षेत्रीय मुख्यालय (Regional HQs) | 700 से ज्यादा कंपनियां |
| नॉन-ऑयल GDP हिस्सा | 65 प्रतिशत से ज्यादा |
कंपनियों के ऑफिस और बाजार पर इसका क्या असर हुआ?
- अब 700 से ज्यादा ग्लोबल कंपनियों ने अपने रीजनल ऑफिस सऊदी अरब में शिफ्ट कर लिए हैं।
- सऊदी की अर्थव्यवस्था अब सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं है, नॉन-ऑयल सेक्टर में 4.9 प्रतिशत की सालाना ग्रोथ देखी गई है।
- नेशनल इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी (NIS) के कारण पिछले चार सालों से लक्ष्य से ज्यादा नतीजे मिले हैं।
- IMF के नए मानकों के हिसाब से अब निवेश की गिनती की जा रही है जिससे डेटा और सटीक हुआ है।