Saudi Arabia: सऊदी अरब में विदेशी निवेश का नया रिकॉर्ड, 1.1 ट्रिलियन रियाल के पार पहुंचा आंकड़ा

सऊदी अरब ने आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। साल 2025 के अंत तक सऊदी अरब में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) का कुल स्टॉक 1.1 ट्रिलियन रियाल यानी करीब 293.3 बिलियन डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा बताता है कि सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में दुनिया भर के निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। Vision 2030 के तहत किए जा रहे सुधारों के चलते देश में निवेश का माहौल बहुत तेजी से बदला है और इसका सीधा फायदा सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को मिल रहा है।
FDI में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी
आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2025 में कुल FDI स्टॉक में 13% का इजाफा दर्ज किया गया है। अगर हम निवेश के प्रवाह की बात करें, तो साल 2025 में 136 बिलियन रियाल यानी करीब 36.3 बिलियन डॉलर का निवेश आया है। यह आंकड़ा साल 2017 के मुकाबले पांच गुना ज्यादा है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि सऊदी अरब ने आर्थिक विकास के लिए सही दिशा चुनी है। इसके अलावा, शुद्ध FDI प्रवाह भी 53% बढ़कर 122 बिलियन रियाल के स्तर पर पहुंच गया है।
वैश्विक स्तर पर सऊदी की धाक
United Nations Conference on Trade and Development (UNCTAD) की वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब अब दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है जहां सबसे ज्यादा विदेशी निवेश आता है। सऊदी अरब ने अपनी रैंकिंग में सुधार करते हुए अब वैश्विक सूची में 13वां स्थान हासिल किया है, जबकि 2024 में देश 17वें स्थान पर था। यह प्रगति देश द्वारा अपनाई गई National Investment Strategy (NIS) का नतीजा है, जिसे 2021 में शुरू किया गया था।
प्रवासी कामगारों और व्यापार के लिए अवसर
सऊदी अरब की यह आर्थिक रफ्तार वहां रहने वाले प्रवासियों के लिए भी अच्छे संकेत लेकर आई है। जैसे-जैसे निवेश बढ़ रहा है, वैसे-वैसे नई कंपनियां भी रियाद और अन्य शहरों में अपने दफ्तर खोल रही हैं। अब तक 700 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को अपने रीजनल हेडक्वार्टर खोलने के लिए लाइसेंस मिल चुके हैं। साथ ही, Saudi Venture Capital Company (SVC) की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी प्राइवेट मार्केट्स में भी 20 बिलियन रियाल का विदेशी निवेश आया है, जो कुल निजी निवेश का 60% है।
सऊदी सरकार की Invest Saudi वेबसाइट के माध्यम से निवेश के नए अवसरों की जानकारी दुनिया भर में दी जा रही है। इन सुधारों का लक्ष्य है कि निजी क्षेत्र का जीडीपी में योगदान 65% तक पहुंच जाए और गैर-तेल निर्यात को 16% से बढ़ाकर 50% तक किया जाए। सरकार की इन नीतियों का सीधा असर वहां काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए नई नौकरियों के मौकों के रूप में दिखाई दे रहा है।