सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने 19 जुलाई 2026 को कतर, जॉर्डन और मिस्र के अपने समकक्षों के साथ महत्वपूर्ण कूटनीतिक चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और मध्य पूर्व में पैदा हुई चुनौतियों का मिलकर सामना करना है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब ईरान की ओर से हाल ही में किए गए हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
क्षेत्रीय देशों ने ईरान की हरकतों पर जताया विरोध
क्षेत्रीय देशों ने ईरान के हालिया आक्रामक रुख की कड़ी निंदा की है। 18 जुलाई को सऊदी अरब, मिस्र और कतर ने आधिकारिक तौर पर इन हमलों को लेकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। सऊदी अरब ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन पर हुए हमलों की कड़ी आलोचना की। वहीं मिस्र ने कुवैत, बहरीन, ओमान, जॉर्डन, इराक और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की निंदा की। कतर ने इसे रेड लाइन पार करने वाला कदम बताया, विशेषकर कुवैत में बिजली और पानी के प्लांटों को निशाना बनाने की घटना को गंभीरता से लिया गया। इसके अलावा, जॉर्डन की सेना ने भी 24 घंटों के भीतर अपने हवाई क्षेत्र में चार ड्रोन इंटरसेप्ट किए।
शांति और स्थिरता के लिए लगातार जारी है कूटनीतिक प्रयास
सऊदी अरब लगातार क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर शांति बहाली के प्रयास में जुटा है। प्रिंस फैसल बिन फरहान ने 12 जुलाई 2026 को कतर, ओमान, बहरीन और जॉर्डन के मंत्रियों के साथ चर्चा की थी, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इससे पहले 27 जून को भी इन देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान द्वारा बहरीन और समुद्री मार्गों को दी जा रही धमकियों के खिलाफ एकजुटता दिखाई थी। इन बैठकों का मकसद अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना और बातचीत के जरिए संघर्षों को सुलझाना है।
