Saudi Arabia Gaza Talks: सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने तुर्की में की बड़ी बैठक, गाजा में शांति और पुनर्निर्माण पर हुई चर्चा
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान तुर्की के अंताल्या में आयोजित ‘Antalya Diplomacy Forum 2026’ में शामिल हुए। यहां उन्होंने गाजा के हालात सुधारने और वहां शांति बहाली के लिए दो अलग-अलग मंत्री स्तरीय बैठकों में हिस्सा लिया। इस बैठक में कई अरब देशों ने मिलकर इसराइल की नीतियों का विरोध किया और गाजा के पुनर्निर्माण पर चर्चा की।
बैठक में किन मुख्य बातों पर हुई चर्चा?
बैठक के दौरान गाजा की मौजूदा स्थिति और वहां फिर से निर्माण कार्य शुरू करने पर बात हुई। अधिकारियों ने शांति योजना के दूसरे चरण में जाने और इसराइल द्वारा शांति प्रक्रिया में डाली जा रही रुकावटों पर चिंता जताई। साथ ही, गाजा में फिलिस्तीनी शासन को जल्द से जल्द नियंत्रण सौंपने और सुरक्षा इंतजाम करने की जरूरत पर जोर दिया गया। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने कहा कि वर्तमान युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलना बहुत जरूरी है।
बैठक में शामिल देश और उनके मुख्य विचार
इस चर्चा में कई महत्वपूर्ण देश शामिल थे जिन्होंने फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। बैठक का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना करना था।
| देश/प्रतिनिधि | मुख्य बात/भूमिका |
|---|---|
| सऊदी अरब | प्रिंस फैसल बिन फरहान ने गाजा शांति वार्ता में हिस्सा लिया |
| तुर्की | विदेश मंत्री हाकन फिदान ने मेजबानी की और स्थायी शांति की मांग की |
| कतर | दो-राज्य समाधान और 1967 की सीमाओं पर स्वतंत्र राज्य का समर्थन किया |
| जॉर्डन | विदेश मंत्री अयमान सफादी ने विवाद की असली वजहों को खत्म करने पर जोर दिया |
| मिस्र, UAE | गाजा के पुनर्निर्माण और शांति प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की |
| पाकिस्तान, इंडोनेशिया | ‘Peace Council’ के सदस्य के तौर पर बैठक में शामिल हुए |
| अमेरिका | पूर्व समन्वय और सचिव मार्को रुबियो के साथ क्षेत्रीय विकास पर चर्चा |
शांति प्रक्रिया और भविष्य की योजना क्या है?
बैठक में दो-राज्य समाधान (two-state solution) का समर्थन किया गया ताकि ईस्ट जेरूसलम की राजधानी के साथ एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य बन सके। जॉर्डन और कतर के प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने और विवाद की बुनियादी वजहों को खत्म करने की बात कही। साथ ही, सभी देशों ने अल-अक्सा मस्जिद जैसी पवित्र जगहों की स्थिति को बनाए रखने और इसराइल की रंगभेद वाली नीतियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय रुख अपनाने की मांग की।