सऊदी अरब की राजधानी रियाद में बुधवार, 18 मार्च 2026 को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक का आयोजन किया गया। सऊदी विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan Al Saud ने तुर्की और जॉर्डन के अपने समकक्षों के साथ क्षेत्र के मौजूदा हालात पर चर्चा की। इस बैठक में मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलती सुरक्षा स्थितियों और बढ़ते तनाव को कम करने के तरीकों पर गौर किया गया।

रियाद में हुई इस बैठक का मुख्य एजेंडा क्या है?

मिडिल ईस्ट में पिछले कुछ हफ्तों से तनाव का माहौल बना हुआ है। 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य अभियानों और उसके बाद हुई जवाबी कार्रवाइयों ने इस क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया है। इन घटनाओं की वजह से बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है और वैश्विक तेल बाजार के साथ-साथ विमान सेवाओं में भी रुकावटें आई हैं। सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बैठक का मकसद क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और हालातों को और ज्यादा बिगड़ने से रोकना है।

तुर्की और अन्य देशों ने क्या रुख अपनाया?

तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने संघर्ष को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चला, तो क्षेत्रीय देशों के आपसी संबंधों को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। इस बैठक में सऊदी, तुर्की और जॉर्डन के अलावा मिस्र, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, कतर, UAE, और बहरीन जैसे देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

  • खाड़ी देशों पर हुए हमलों को क्षेत्रीय भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया गया।
  • शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों से बातचीत जारी रखने की अपील की गई।
  • बैठक में शामिल सभी देशों ने सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आपसी सहयोग और समन्वय पर सहमति जताई।
  • संघर्ष के कारण ग्लोबल मार्केट और एविएशन सेक्टर पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को रोकने के उपायों पर भी बात हुई।
Sushma Kumari

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