सऊदी अरब और फ्रांस के बीच ऐतिहासिक समझौता, डिफेंस और टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए हुए बड़े ऐलान.

Aanya24 August 20262 min read46 viewsSaudi
सऊदी अरब और फ्रांस के बीच ऐतिहासिक समझौता, डिफेंस और टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए हुए बड़े ऐलान.

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने पेरिस के एलीस पैलेस में अपनी बैठकों के बाद मध्य पूर्व की स्थिरता और सुरक्षा पर एक संयुक्त बयान जारी किया है। यह मुलाकात 24 अगस्त 2026 को हुई, जो दोनों देशों के बीच दो दिन की आधिकारिक यात्रा के दौरान संपन्न हुई। इस आधिकारिक दौरे के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने सऊदी-फ्रांसीसी रणनीतिक साझेदारी परिषद की पहली बैठक की सह-अध्यक्षता की, जिससे रक्षा, निवेश, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पर्यटन के क्षेत्र में नए समझौतों की शुरुआत हुई। इस दौरान पेरिस के पास तीन थीम पार्क बनाने के लिए किदिया के नेतृत्व वाली परियोजना के तहत 7 अरब डॉलर के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

यमन और समुद्री सुरक्षा को लेकर सख्त कदम

यमन के संघर्ष के बारे में दोनों देशों ने यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद और संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों का समर्थन दोहराया है ताकि एक व्यापक राजनीतिक समझौता किया जा सके। नेताओं ने सऊदी अरब के भीतर नागरिक बुनियादी ढांचे और महत्वपूर्ण सुविधाओं पर हाउथी हमलों की कड़ी निंदा की है। यह निंदा 24 अगस्त 2026 को हुई एक विशिष्ट घटना के बाद आई, जिसमें सऊदी नेशनल शिपिंग कंपनी Bahri ने बताया कि उसका जहाज 'अमज़ान' यान्बु से 63 समुद्री मील पश्चिम में एक बैलिस्टिक मिसाइल की चपेट में आ गया था। हालांकि जहाज पर आग लग गई थी, लेकिन सभी क्रू मेंबर सुरक्षित बताए गए और पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है।

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गाजा, लेबनान और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा

क्षेत्रीय मोर्चे पर दोनों नेताओं ने गाजा की स्थिति पर बातचीत की और हमास के सफाए या हथियार डालने के समझौते का स्वागत किया। उन्होंने स्थायी युद्धविराम और मानवीय सहायता की सुरक्षित डिलीवरी की मांग की। उन्होंने इजरायली बस्तियों के निर्माण का विरोध किया और 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के समर्थन को फिर से दोहराया। बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया गया, समुद्री मार्गों के लिए खतरों की निंदा की गई और लेबनान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 को लागू करने का आह्वान किया गया।

ईरान और सूडान के संकट पर रुख

इसके अलावा इस बयान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बनाए रखने और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करने की मांग की गई। सूडान के संकट को लेकर फ्रांस और सऊदी अरब ने देश की संप्रभुता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया और विदेशी हस्तक्षेप तथा चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की बात कही। भारत और अन्य देशों से खाड़ी क्षेत्र में यात्रा करने वाले तथा वहां काम करने वाले प्रवासियों के लिए भी क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता का यह समझौता बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे व्यापार और उड़ानों के रास्तों पर सकारात्मक असर पड़ता है।

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