सऊदी अरब और फ्रांस अब खनन (mining) के क्षेत्र में हाथ मिला रहे हैं। सऊदी के उद्योग और खनिज संसाधन उप मंत्री खालिद अल-मुदाइफ़र ने फ्रांसीसी अधिकारियों के साथ अहम बैठक की, ताकि दोनों देशों के बीच इस सेक्टर में सहयोग को और मजबूत किया जा सके।

इस चर्चा का मुख्य मकसद निवेश के नए मौके तलाशना और जरूरी खनिजों (critical minerals) के उत्पादन में एक-दूसरे की मदद करना था। अल-मुदाइफ़र ने बताया कि सऊदी अरब विजन 2030 के तहत अपने खनन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला रहा है। इसके लिए सरकार नए कानून बना रही है और बड़े पैमाने पर सर्वे का काम किया जा रहा है।

सऊदी अरब के पास खनिजों का एक बहुत बड़ा खजाना है, जिसकी कीमत करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर बताई गई है। इसमें सोना, तांबा, जस्ता, फॉस्फेट, एल्युमीनियम और दुर्लभ तत्व शामिल हैं। ये खनिज भविष्य की नई तकनीकों और उद्योगों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।

इस बैठक में फ्रांस के स्ट्रेटेजिक मिनरल्स डेलीगेट, फ्रेंच जियोलॉजिकल एंड माइनिंग रिसर्च ब्यूरो (BRGM) के वैज्ञानिक डायरेक्टर और एरामेट (Eramet) जैसी बड़ी कंपनियों के बड़े अधिकारी शामिल हुए।

यह पूरा सहयोग दिसंबर 2024 में सऊदी अरब और फ्रांस के बीच हुए एक रणनीतिक समझौते के तहत हो रहा है। इस समझौते में एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में साथ काम करने की बात कही गई है।

इससे पहले अप्रैल 2026 में सऊदी कैबिनेट ने फ्रांस के साथ निवेश और तकनीक के आदान-प्रदान के लिए एक आधिकारिक सहमति पत्र को मंजूरी दी थी। साथ ही, सऊदी मंत्री बन्दर अल-खुरैयफ ने भी अप्रैल और मई 2026 में फ्रांसीसी अधिकारियों के साथ कई बैठकें की थीं, ताकि खनिज खोज और निवेश की प्रक्रियाओं को तेज किया जा सके।