यमन के हद्रमौत इलाके में अब बिजली की किल्लत दूर होने वाली है। सऊदी अरब की मदद से यहाँ बड़े पावर प्लांट लगाने का काम शुरू हो गया है। सोमवार को अल-मुकल्ला शहर में इसकी नींव रखी गई, जिससे तटवर्ती इलाकों में बिजली की सप्लाई बेहतर होगी और लोगों का जीवन आसान बनेगा।

हदीरमौत में बिजली प्लांट की क्या योजना है?

इस प्रोजेक्ट के तहत हद्रमौत तट के लिए कुल 100 मेगावाट (MW) क्षमता के पावर प्लांट लगाए जाएंगे। इसमें दो मुख्य स्टेशन शामिल हैं। एक Jawl Masah स्टेशन है जिसकी क्षमता 40 मेगावाट होगी और दूसरा Ambikha स्टेशन है जिसकी क्षमता 60 मेगावाट होगी।

  • इस पूरे प्रोजेक्ट की फंडिंग Saudi Program for the Development and Reconstruction of Yemen (SPDRY) कर रहा है।
  • काम को पूरा करने की जिम्मेदारी Gulf Power International (GPI) को दी गई है, जो इसे Build-Operate-Transfer (BOT) मॉडल पर लागू करेगा।
  • इस काम में यमन का बिजली और ऊर्जा मंत्रालय भी साथ मिलकर काम कर रहा है।

प्रोजेक्ट के लिए कितनी फंडिंग और क्या लक्ष्य है?

सऊदी अरब ने यमन के विकास के लिए बड़े स्तर पर आर्थिक मदद का ऐलान किया है। जनवरी 2026 में सऊदी अरब ने विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए लगभग 506 मिलियन डॉलर की राशि दी थी।

विवरण जानकारी
कुल बजट (जनवरी 2026) 506 मिलियन डॉलर (1.9 बिलियन सऊदी रियाल)
वर्तमान क्षमता 100 मेगावाट (तटवर्ती क्षेत्र)
भविष्य की योजना घाटी और रेगिस्तानी क्षेत्रों के लिए 100 मेगावाट और
MoU की तारीख 13 नवंबर 2025

आम लोगों और क्षेत्र पर इसका क्या असर पड़ेगा?

हदीरमौत के गवर्नर सलीम अल-खानबाशी और ऊर्जा मंत्री अदनान अल-काफ ने इस प्रोजेक्ट की अहमियत बताई है। उनका कहना है कि बिजली की बेहतर सुविधा से न केवल घर रोशन होंगे, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के स्तर में भी सुधार आएगा।

सऊदी अधिकारियों ने साफ किया है कि इस मदद का मुख्य उद्देश्य यमन की अर्थव्यवस्था को स्थिर करना और वहां के लोगों के रहने की स्थिति को बेहतर बनाना है। आने वाले समय में ग्रिड की क्षमता बढ़ेगी जिससे बिजली बार-बार कटने की समस्या कम होगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

हदीरमौत तट पर कुल कितनी बिजली पैदा होगी?

कुल 100 मेगावाट बिजली पैदा होगी, जिसमें Jawl Masah स्टेशन से 40 मेगावाट और Ambikha स्टेशन से 60 मेगावाट बिजली मिलेगी।

इस प्रोजेक्ट को कौन लागू कर रहा है और इसका मॉडल क्या है?

इस प्रोजेक्ट को Gulf Power International (GPI) लागू कर रहा है और यह Build-Operate-Transfer (BOT) मॉडल पर आधारित है।