सऊदी अरब अब पूरी दुनिया में पानी के बेहतर इस्तेमाल और प्रबंधन के लिए अगुवाई कर रहा है। इसके लिए जेद्दा में एक बड़ा फ्रेमवर्क तैयार किया गया है ताकि दुनिया के तमाम देश मिलकर पानी की किल्लत को दूर कर सकें। इस पहल के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पानी के क्षेत्र में एक साथ काम करने का रास्ता दिखाया गया है।
सऊदी वाटर वीक का आयोजन
जेद्दा में 28 जून से 2 जुलाई 2026 तक ‘Saudi Water Week’ का आयोजन किया गया। इस पांच दिनों के इवेंट में दुनिया भर के नीति निर्माता और एक्सपर्ट जुटे ताकि पानी की सुरक्षा और इसे बचाने के नए तरीकों पर चर्चा हो सके। इस कार्यक्रम में 7वें अरब वाटर फोरम का आयोजन भी हुआ और साथ ही 2027 में रियाद में होने वाले 11वें वर्ल्ड वाटर फोरम की तैयारी पर बातचीत हुई।
भारत और अन्य देशों के साथ समझौते
इस आयोजन के दौरान सऊदी अरब ने कई अहम देशों और कंपनियों के साथ हाथ मिलाया है, जिसका सीधा असर पानी के प्रबंधन पर पड़ेगा:
- भारत और सऊदी अरब: दोनों देशों के बीच एक MoU साइन हुआ है। इसके तहत सिंचाई प्रणालियों, पानी के टिकाऊ प्रबंधन और तकनीकी जानकारी साझा करने पर जोर दिया जाएगा।
- LONGi Green Energy: सऊदी वाटर अथॉरिटी (SWA) और इस चीनी कंपनी के बीच समझौता हुआ है। अब पानी बनाने और उसे बांटने के बुनियादी ढांचे में रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल होगा।
- मिस्र (Egypt): मिस्र के जल संसाधन मंत्री हानी सेविलम और सऊदी मंत्री अब्दुल रहमान अल-फदली ने क्षेत्रीय जल सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने और साझा प्रोजेक्ट्स चलाने पर बात की।
ग्लोबल वाटर ऑर्गनाइजेशन और विजन 2030
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सितंबर 2023 में ग्लोबल वाटर ऑर्गनाइजेशन (GWO) की घोषणा की थी, जिसे 28 मई 2025 को रियाद में लॉन्च किया गया। सऊदी अरब ने इस संस्था के शुरुआती पांच साल के खर्च का पूरा जिम्मा लिया है और इसका हेडक्वार्टर भी रियाद में ही होगा।
पर्यावरण, जल और कृषि मंत्री अब्दुल रहमान अल-फदली ने बताया कि सऊदी विजन 2030 और नेशनल वाटर स्ट्रैटेजी के तहत पिछले दस सालों में पानी के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए गए हैं। इससे न केवल बुनियादी ढांचा सुधरा है, बल्कि यह क्षेत्र निजी निवेश के लिए भी आकर्षक बना है। अब तक इस सेक्टर में 60 अरब सऊदी रियाल (लगभग 16 अरब अमेरिकी डॉलर) का निवेश आ चुका है।
सऊदी अरब ने गैर-नवीकरणीय भूजल के इस्तेमाल को कम किया है और समुद्र के पानी से पीने योग्य पानी बनाने की क्षमता को बढ़ाया है, जिसकी वजह से UN-Water ने सऊदी अरब को एक ग्लोबल मॉडल के रूप में चुना है।
