सऊदी अरब में हज यात्रियों की सुविधा के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। हज और उमराह मंत्री ने ऐलान किया है कि पवित्र स्थलों को हरा-भरा बनाने के लिए 60 हजार से ज्यादा पेड़ लगाए गए हैं। इसके साथ ही गर्मी से बचाने के लिए एक खास कूलिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा ताकि जायरीन को सफर में कोई परेशानी न हो।
पवित्र स्थलों पर कितने पेड़ लगाए गए और इसका क्या फायदा होगा?
सरकार ने ‘ग्रीन मशाएर’ पहल के तहत कुल 60 हजार से ज्यादा पेड़ लगाए हैं। इस काम को दो चरणों में पूरा किया गया, जिसमें पहले 20 हजार और फिर 40 हजार पेड़ लगाए गए। ये पेड़ मुख्य रूप से मीना, अराफात और मुजदलिफा में लगाए गए हैं। इनका मकसद प्राकृतिक छाया देना, तापमान कम करना और हवा की क्वालिटी को बेहतर बनाना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले हज सीजन के मुकाबले अब वहां हरियाली तीन गुना बढ़ गई है।
गर्मी कम करने के लिए क्या खास इंतजाम किए गए हैं?
जायरीनों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए 6 हजार से ज्यादा मिस्टिंग कॉलम (पानी की बौछार करने वाले खंभे) लगाए जाएंगे। इस सिस्टम के लिए 5 ऑपरेशनल स्टेशन बनाए गए हैं, जिनकी क्षमता हर घंटे 1,500 क्यूबिक मीटर पानी छोड़ने की है। इसके अलावा, पीने के पानी के लिए ‘सुकिया’ कोल्ड वाटर सिस्टम तैयार किया गया है। इसमें 5 स्टेशन हैं और 25 हजार से ज्यादा ठंडे पानी के नल लगाए गए हैं, ताकि यात्रियों को आसानी से साफ और ठंडा पानी मिल सके।
इन प्रोजेक्ट्स को कौन लागू कर रहा है और इसका मकसद क्या है?
इन सभी प्रोजेक्ट्स को लागू करने की जिम्मेदारी किदाना डेवलपमेंट एंड डेवलपमेंट कंपनी (Kidana Development and Development Company) को सौंपी गई है। यह कंपनी रॉयल कमीशन फॉर मक्का सिटी एंड होली साइट्स की कार्यकारी शाखा के रूप में काम कर रही है। ये सभी कदम सऊदी विजन 2030 और ग्रीन सऊदी पहल के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उठाए गए हैं, ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके और तीर्थयात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मिलें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ग्रीन मशाएर पहल के तहत कितने पेड़ लगाए गए हैं?
इस पहल के तहत कुल 60 हजार से ज्यादा पेड़ लगाए गए हैं, जिनमें मीना, अराफात और मुजदलिफा जैसे पवित्र स्थल शामिल हैं।
हज यात्रियों के लिए कूलिंग सिस्टम में क्या सुविधाएं हैं?
तापमान कम करने के लिए 6 हजार मिस्टिंग कॉलम और पीने के लिए 25 हजार ठंडे पानी के नल लगाए गए हैं।
