सऊदी अरब ने हज 1447H (2026) के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार सरकार का पूरा जोर पर्यावरण को बचाने और ‘ग्रीन हज’ पर है। हज यात्रियों के लिए कुछ खास दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं ताकि पवित्र स्थलों की सफाई और हरियाली बनी रहे।
हज यात्रियों के लिए पर्यावरण संबंधी क्या नियम हैं?
पर्यावरण मंत्रालय और अन्य सरकारी संस्थाओं ने यात्रियों के लिए कुछ ज़रूरी गाइडलाइन्स जारी की हैं, जिनका पालन करना ज़रूरी होगा:
- कचरा प्रबंधन: कचरे को केवल तय की गई जगहों पर ही फेंकें और पेड़-पौधों को नुकसान न पहुँचाएँ।
- पानी की बचत: वज़ू करते समय पानी का कम इस्तेमाल करें और इस्तेमाल के बाद नल को ठीक से बंद करें। पानी पीते समय उसे बर्बाद न करें और इको-फ्रेंडली बोतलों का इस्तेमाल करें।
- जानवरों की सुरक्षा: किसी भी पक्षी या जानवर को परेशान न करें और न ही उनके पास जाएँ।
- सस्टेनेबल इहराम: हज के दौरान पर्यावरण के अनुकूल इहराम इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
- खाने की बर्बादी: उतना ही खाना लें जितनी ज़रूरत हो, ताकि भोजन बर्बाद न हो।
Hajj 1447H के लिए सऊदी सरकार ने क्या खास तैयारियां की हैं?
मक्का सिटी और पवित्र स्थलों के रॉयल कमीशन और कडना (Kadana) कंपनी ने बताया कि हज 1447H के लिए तैयारियां 100% पूरी हो चुकी हैं। मक्का क्षेत्र के डिप्टी गवर्नर प्रिंस सऊद बिन मिशाल बिन अब्दुलअजीज ने इस बात की पुष्टि की है।
- बजट और निवेश: पिछले चार सालों में करीब 6 अरब सऊदी रियाल का निवेश किया गया है ताकि सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सके।
- हरियाली: पर्यावरण को सुधारने के लिए अब तक कुल 60,000 पेड़ लगाए गए हैं।
- सुविधाएं: जामरात में ठंडी हवा देने वाले मिस्टिंग फैन की संख्या बढ़ाकर 400 कर दी गई है और छायादार रास्तों को बढ़ाकर 1,05,000 वर्ग मीटर कर दिया गया है।
- स्वास्थ्य सेवा: मीना में इमरजेंसी हॉस्पिटल बेड की क्षमता को 200% तक बढ़ाया गया है और restrooms में इंतज़ार के समय को 75% तक कम किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
हज 1447H के लिए सऊदी सरकार ने क्या बुनियादी बदलाव किए हैं?
सरकार ने 6 अरब रियाल खर्च कर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारा है, जिसमें 60,000 पेड़ लगाना, जामरात में पंखे बढ़ाना और मीना में हॉस्पिटल बेड की क्षमता 200% तक बढ़ाना शामिल है।
पर्यावरण बचाने के लिए यात्रियों को किन बातों का ध्यान रखना होगा?
यात्रियों को कचरा तय जगह पर फेंकना होगा, पानी की बर्बादी रोकनी होगी, जानवरों को नुकसान नहीं पहुँचाना होगा और खाने की बर्बादी कम करनी होगी।
