सऊदी अरब में हज 1447 हिजरी के पवित्र सफर पर गए हज यात्री आज शुक्रवार, 29 मई 2026 को अयाम-ए-तशरीक (Days of Tashreeq) के दूसरे दिन ‘रमी अल-जमराह’ यानी शैतान को कंकड़ मारने की रस्म पूरी कर रहे हैं। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) के अनुसार, हज यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आज के दिन यात्रियों को मीना से जल्दी निकलने का भी मौका मिलता है, जिसे ‘नफ़र अव्वल’ कहते हैं।

रमी अल-जमराह के नियम और मीना से जल्दी निकलने का विकल्प

हज के इस महत्वपूर्ण चरण में यात्री तीन खंभों – छोटे (Sughra), मध्यम (Wusta) और बड़े (Aqabah) जमराह पर सात-सात कंकड़ मारते हैं। हर बार कंकड़ फेंकते समय ‘अल्लाहू अकबर’ का जाप किया जाता है। छोटे और मध्यम जमराह पर कंकड़ मारने के बाद किबला की तरफ मुंह करके दुआ मांगी जाती है, लेकिन बड़े जमराह के बाद ऐसा नहीं किया जाता है।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई विद्वानों के अनुसार दोपहर (जवाल) से पहले और बाद में भी कंकड़ मारना जायज माना गया है। इसके अलावा, मीना की रातों में रुकना सुन्नत माना गया है ताकि यात्रियों को कोई परेशानी न हो। जो लोग जल्दी लौटना चाहते हैं, वे दूसरे दिन यानी 29 मई 2026 को सूरज डूबने से पहले मीना से निकल सकते हैं। अगर वे ऐसा नहीं कर पाते, तो उन्हें तीसरे दिन भी रुकना पड़ता है, जो कि धार्मिक दृष्टि से अधिक पुण्य का काम माना जाता है।

मंत्रालयों की तैयारियां और आखिरी रस्म तवाफ अल-विदा

सऊदी अरब के गृह मंत्रालय और Ministry of Hajj and Umrah ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। बिना परमिट के मक्का और पवित्र स्थलों में प्रवेश पर सख्त पाबंदी है। Religious Affairs के अध्यक्ष Sheikh Dr. Abdulrahman Al Sudais ने बताया कि इस बार के ऑपरेशनल प्लान का मुख्य उद्देश्य यात्रियों के आध्यात्मिक अनुभव को आसान और बेहतर बनाना है।

मीना से निकलने के बाद सभी यात्रियों को मक्का जाकर ‘तवाफ अल-विदा’ (Farewell Circumambulation) करना होता है। यह मक्का छोड़ने से पहले की जाने वाली आखिरी रस्म है। इसे छोड़ना नियम के विरुद्ध माना जाता है और इसके लिए जुर्माना भी लग सकता है, हालांकि विशेष परिस्थितियों में महिलाओं को इससे छूट दी गई है। मिस्र के दार अल-इफ्ता ने भी हज नियमों में यात्रियों की आसानी और लचीलेपन पर विशेष जोर दिया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

रमी अल-जमराह का सही समय क्या है और क्या मीना से जल्दी निकला जा सकता है?

भीड़ प्रबंधन के लिए दोपहर (जवाल) से पहले और बाद का समय कंकड़ मारने के लिए जायज है। यात्री चाहें तो तशरीक के दूसरे दिन यानी 29 मई 2026 को सूरज डूबने से पहले मीना छोड़ सकते हैं।

तवाफ अल-विदा क्या है और क्या यह सभी के लिए जरूरी है?

तवाफ अल-विदा मक्का से विदा होने से पहले की जाने वाली आखिरी रस्म है। यह सभी यात्रियों के लिए जरूरी है और न करने पर जुर्माना लगता है, केवल विशेष शारीरिक परिस्थितियों वाली महिलाओं को इससे छूट है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.