सऊदी अरब में हज 2026 के पवित्र अनुष्ठानों के तहत तशरीक़ के पहले दिन ‘किंग के मेहमानों’ (Guests of the Custodian of the Two Holy Mosques) ने मीना में तीनों जमरात पर कंकड़ फेंकने की रस्म को सुरक्षित तरीके से शुरू किया है. आधिकारिक तौर पर 28 मई 2026 को इस महत्वपूर्ण रस्म की शुरुआत हुई. सऊदी सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी में हाजियों ने बिना किसी परेशानी के इस प्रक्रिया को पूरा किया है.

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जमरात में कंकड़ मारने की रस्म कैसे पूरी की गई?

तशरीक़ के पहले दिन, जिसे ‘यौम अल-क़र’ यानी ठहराव का दिन भी कहा जाता है, हज यात्रियों ने मीना में तीन जमरा (पत्थरों के खंभों) पर कंकड़ फेंके. सबसे पहले छोटे जमरा (Al-Jamarah Al-Sughra), फिर मध्यम जमरा (Al-Jamarah Al-Wusta) और अंत में बड़े जमरा (Jamarat Al-Aqaba) पर सात-सात कंकड़ मारे गए. हज यात्रियों की सुरक्षा के लिए जमरात केंद्र में अलग-अलग मंजिलों पर खास रास्ते बनाए गए थे, जिससे भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मदद मिली है.

मंत्रालयों और सुरक्षा बलों ने सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की?

इस पवित्र रस्म को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए सऊदी अरब के कई मंत्रालयों ने अपनी सेवाएं दी हैं:

  • Ministry of Hajj and Umrah: मंत्रालय ने सभी हज यात्रियों के लिए विशेष समय सारिणी और दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि भीषण गर्मी (लगभग 42 डिग्री सेल्सियस तापमान) में लू और थकान से बचा जा सके.
  • Ministry of Interior: गृह मंत्रालय ने मीना और तंबुओं के आसपास पैदल चलने वाले यात्रियों के रास्तों को नियंत्रित कर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी है.
  • Presidency of State Security: सुरक्षा विमानन कमान ने आसमान से भीड़ की आवाजाही पर पैनी नजर रखी ताकि यातायात सुचारू रूप से चलता रहे.
  • Ministry of Islamic Affairs: इस मंत्रालय ने हज यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं.

तशरीक़ के दिनों से जुड़े जरूरी नियम क्या हैं?

हज यात्रियों को धुल-हिज्जा की 11, 12 और 13 तारीख की रातें मीना में बितानी होती हैं. हालांकि, कुछ यात्री दो रातें बिताने के बाद जल्दी भी रवाना हो सकते हैं. इन दिनों में उपवास (व्रत) रखना पूरी तरह प्रतिबंधित होता है, केवल उन यात्रियों को छूट मिलती है जो तमतु या क़िरान हज कर रहे हैं और कुर्बानी के लिए जानवर की व्यवस्था नहीं कर पाए हैं.

Frequently Asked Questions (FAQs)

तशरीक़ का पहला दिन कब मनाया गया और इसका क्या महत्व है?

यह दिन 28 मई 2026 को मनाया गया, जिसे ‘यौम अल-क़र’ भी कहा जाता है. इस दिन हज यात्री ईद-उल-अजहा की रस्में पूरी करने के बाद मीना में ठहरते हैं और जमरात को कंकड़ मारते हैं.

जमरात की रस्म के दौरान मौसम की क्या स्थिति रही?

जमरात की रस्म के दौरान अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया. सऊदी सरकार ने लू से बचने के लिए यात्रियों को तय समय सीमा का पालन करने की हिदायत दी थी.