सऊदी अरब ने साल 2026 (1447 AH) के हज सीजन के लिए बहुत कड़े नियम लागू किए हैं. अब मक्का और पवित्र स्थलों पर सिर्फ वही लोग जा सकेंगे जिनके पास आधिकारिक हज परमिट होगा. विज़िट वीज़ा पर आए लोग हज नहीं कर पाएंगे और ऐसा करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी. यह फैसला भीड़ को कंट्रोल करने और यात्रियों की सुरक्षा के लिए लिया गया है.
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बिना परमिट हज करने पर क्या होगा जुर्माना और सज़ा?
सऊदी सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह के विज़िट वीज़ा का इस्तेमाल हज करने के लिए नहीं किया जा सकता. अगर कोई विज़िट वीज़ा धारक बिना परमिट के हज करने या पवित्र स्थलों में घुसने की कोशिश करेगा, तो उस पर 20,000 सऊदी रियाल तक का जुर्माना लगेगा. वहीं, जो रेजिडेंट्स या वीज़ा खत्म होने के बाद भी वहां रुके हुए लोग बिना परमिट के हज करेंगे, उन्हें तुरंत डिपोर्ट कर दिया जाएगा और 10 साल तक सऊदी अरब में दोबारा आने की एंट्री बंद कर दी जाएगी.
उमराह वीज़ा और मक्का में एंट्री के नियम क्या हैं?
उमराह पर आने वाले यात्रियों के लिए सऊदी छोड़ने की आखिरी तारीख 18 अप्रैल 2026 तय की गई है. नुसुक (Nusuk) प्लेटफॉर्म पर उमराह परमिट 18 अप्रैल से 31 मई 2026 तक के लिए बंद रहेंगे. हालांकि, कुछ खास कैटेगरी के लोग जैसे प्रीमियम रेजिडेंस होल्डर्स, इन्वेस्टर्स, GCC देशों के नागरिक और सऊदी नागरिकों की गैर-सऊदी मांएं अबशेर (Absher) प्लेटफॉर्म के ज़रिए एंट्री परमिट ले सकेंगे. आम रेजिडेंट्स के लिए मक्का में एंट्री 19 अप्रैल 2026 से ही बंद कर दी गई है.
मदद करने वालों और घर देने वालों पर कितना जुर्माना लगेगा?
इंटीरियर मिनिस्ट्री ने उन लोगों के लिए भी भारी जुर्माने का ऐलान किया है जो अवैध रूप से हज करने वालों की मदद करेंगे. अगर कोई व्यक्ति विज़िट वीज़ा धारकों को मक्का में रहने के लिए जगह देता है, उन्हें छिपाता है या किसी भी तरह की सहायता करता है, तो उस पर 1 लाख सऊदी रियाल तक का जुर्माना लगाया जाएगा. यह नियम 1 धुल कादा से 14 धुल हिज्जा तक लागू रहेगा और जितने ज़्यादा लोग पकड़े जाएंगे, जुर्माना भी उतना ही बढ़ाया जाएगा.