सऊदी अरब में हज 1447H की तैयारियां ज़ोरों पर हैं और इस बार यात्रियों की सेहत और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बेहद कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। नेशनल सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल कम्प्लायंस (NCEC) ने पवित्र स्थलों यानी मक्का, मदीना और अल-मशायर अल-मुकद्दसा में हवा, पानी और मिट्टी की शुद्धता बनाए रखने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत 60 से ज़्यादा महिला और पुरुष इंस्पेक्टरों की टीम तैनात की गई है जो चौबीसों घंटे काम कर रही है।
हज यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या हैं खास इंतजाम?
सऊदी सरकार ने हज यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा प्लान तैयार किया है जिसके तहत 1500 से ज़्यादा फील्ड इंस्पेक्शन विजिट किए जा रहे हैं। पर्यावरण की शुद्धता जांचने के लिए पवित्र स्थलों पर 20 रियल-टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए गए हैं। ये स्टेशन हवा में मौजूद 21 अलग-अलग तत्वों जैसे सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की लगातार निगरानी करते हैं। इसके अलावा पानी और मिट्टी की तुरंत जांच के लिए मोबाइल लैबोरेट्रीज भी तैनात की गई हैं।
अधिकारियों ने हवा की शुद्धता पर क्या जानकारी दी?
नेशनल सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल कम्प्लायंस (NCEC) के प्रवक्ता साद अल-मुतरफी ने बताया है कि पवित्र स्थलों पर अभी तक हवा में प्रदूषण का कोई भी खतरनाक स्तर नहीं पाया गया है। वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण हवा में मामूली असर देखा गया है, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। इसके साथ ही मक्का और अन्य पवित्र स्थलों में शोर यानी आवाज के प्रदूषण पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि यात्रियों को कोई परेशानी न हो।
सऊदी विजन 2030 के तहत हो रहा है पूरा काम
सऊदी अरब के इस पूरे पर्यावरण अभियान को सऊदी विजन 2030 के लक्ष्यों के साथ जोड़ा गया है। इसके तहत सभी गतिविधियों की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगाम लगाई जा सके। महानिदेशक अब्दुल्ला अल-अयूनी ने पुष्टि की है कि फील्डवर्क 24 घंटे लगातार जारी है और अधिकारी पूरी सतर्कता बरत रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पवित्र स्थलों पर हवा की जांच कैसे की जा रही है?
इसके लिए 20 रियल-टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (स्थिर और मोबाइल) लगाए गए हैं जो हवा में मौजूद 21 हानिकारक तत्वों की लगातार जांच करते हैं।
क्या मक्का और मदीना में प्रदूषण का कोई खतरा है?
NCEC के प्रवक्ता साद अल-मुतरफी के अनुसार, पवित्र स्थलों में प्रदूषण का कोई खतरनाक स्तर नहीं मिला है। गाड़ियों की वजह से सामान्य असर देखा गया है जो नियंत्रण में है।