सऊदी अरब में चल रहे हज के बीच सऊदी प्रेस एजेंसी (SPAENG) ने सोशल मीडिया पर 1360s AH (हिजरी) की एक बेहद पुरानी और ऐतिहासिक तस्वीर शेयर की है। इस तस्वीर में हाजी मीना में जमारात की रस्म यानी शैतान को कंकड़ मारने की रस्म निभाते हुए दिख रहे हैं। 27 मई 2026 को इस साल के हज के दौरान लाखों हाजियों ने इस रस्म को सफलतापूर्वक पूरा किया है। आइए जानते हैं कि इस महत्वपूर्ण रस्म का इतिहास क्या है और इसे कैसे पूरा किया जाता है।

क्या है जमारात की रस्म और इसका इतिहास?

जमारात की रस्म को “रमी अल-जमारात” या शैतान को कंकड़ मारना भी कहा जाता है। यह हज यात्रा का एक बेहद खास हिस्सा है जो सऊदी अरब के मीना में पूरा किया जाता है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, यह रस्म हजरत इब्राहिम के उस वाकये की याद दिलाती है जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने का फैसला किया था। उस वक्त शैतान ने उन्हें बहकाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने कंकड़ मारकर शैतान को भगा दिया था।

तीन जमारात (छोटे, मध्यम और बड़े खंभे) इसी घटना के प्रतीक हैं। साल 2004 में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन खंभों की जगह बड़ी दीवारें बना दी गईं ताकि हाजियों को कंकड़ मारने में आसानी हो और कोई दुर्घटना न हो।

27 मई 2026 को कैसे पूरी हुई यह रस्म और क्या हैं नियम?

27 मई 2026 को लाखों हज यात्रियों ने मीना में सबसे बड़े खंभे यानी जमारात अल-अकबा पर कंकड़ मारे। यह रस्म ईद अल-अजहा के पहले दिन पूरी की जाती है। मुजदलिफा से लौटने के बाद हाजी मक्का की ग्रैंड मस्जिद में नमाज अदा करते हैं और फिर 7 कंकड़ मारकर इस रस्म की शुरुआत करते हैं।

इसके बाद आने वाले तीन दिनों में, जिन्हें तशरीक के दिन कहा जाता है, हाजी तीनों जमारात—जमारात अल-सुगरा (छोटा), जमारात अल-वुस्ता (मझला) और जमारात अल-अकबा (बड़ा)—पर 7-7 कंकड़ मारते हैं। कंकड़ मारने के बाद हाजी अपनी कुर्बानी देते हैं और बाल कटवाकर एहराम की स्थिति से बाहर आते हैं।

सऊदी प्रशासन ने सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए हैं?

सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) के अनुसार, इस विशाल आयोजन को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए सऊदी प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। बहुमंजिला जमारात ब्रिज पर भीड़ नियंत्रण के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल, स्काउट्स, स्वास्थ्य टीमें और नागरिक सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।

सऊदी रक्षा मंत्रालय भी सुरक्षा बलों के साथ मिलकर हाजियों की सुरक्षा और आवाजाही की निगरानी कर रहा है। प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, इस साल कंकड़ मारने की यह रस्म बिना किसी बड़े हादसे या भीड़भाड़ के बेहद शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से पूरी हुई है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

जमारात की रस्म में कितने कंकड़ मारे जाते हैं?

पहले दिन जमारात अल-अकबा (सबसे बड़े खंभे) पर 7 कंकड़ मारे जाते हैं। इसके बाद तशरीक के अगले तीन दिनों में तीनों जमारात (छोटे, मध्यम और बड़े) पर 7-7 कंकड़ मारे जाते हैं।

हज में जमारात की रस्म का क्या महत्व है?

यह रस्म हजरत इब्राहिम द्वारा अल्लाह के हुक्म पर बेटे की कुर्बानी के समय शैतान के बहकावे को ठुकराने और उसे कंकड़ मारने की याद में निभाई जाती है। यह बुराई को नकारने का प्रतीक है।