सऊदी अरब में हज 2026 के पवित्र अनुष्ठान अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुके हैं। 29 मई 2026 को ताशरीक के दूसरे दिन लाखों हज यात्रियों ने मीना में जमारात (शैतान) को कंकड़ियां मारने की रस्म को शांतिपूर्वक जारी रखा। इस महत्वपूर्ण अनुष्ठान को पूरा करने के बाद बड़ी संख्या में हाजियों ने मक्का की मस्जिद अल-हरम की ओर रुख किया, जहां उन्होंने अपना विदाई तवाफ (तवाफ अल-विदा) शुरू किया।
जमारात पर कंकड़ फेंकने के क्या नियम हैं?
हज के नियमों के तहत ताशरीक के दिनों में तीर्थयात्रियों को मीना में तीन पत्थरों के ढांचों पर कंकड़ फेंकने होते हैं। कंकड़ फेंकने की इस प्रक्रिया का एक तय क्रम होता है, जिसे हर हाजी को मानना अनिवार्य है।
- तीर्थयात्री सबसे पहले छोटे पिलर (जमारात अल-उला), फिर मध्यम पिलर (जमारात अल-वुस्ता) और अंत में बड़े पिलर (जमारात अल-अकबा) पर सात-सात कंकड़ मारते हैं।
- कंकड़ फेंकने के लिए पारंपरिक रूप से पत्थरों को मुजदलिफा से इकट्ठा किया जाता है।
- इस अनुष्ठान के दौरान हाजियों का वूझू (शुद्धता) की स्थिति में होना जरूरी है और हर कंकड़ फेंकते समय “अल्लाहु अकबर” का जाप करना होता है।
- नियम के अनुसार, छोटे और मध्यम जमारात पर कंकड़ मारने के बाद किबला की तरफ मुंह करके दुआ मांगी जाती है, लेकिन बड़े जमारात के बाद दुआ नहीं मांगी जाती।
भीषण गर्मी के बीच सऊदी प्रशासन के खास इंतजाम
साल 2026 के हज के दौरान तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इस भीषण गर्मी से हज यात्रियों को बचाने के लिए सऊदी प्रशासन ने कई आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एआई (AI) तकनीक और स्वास्थ्य सहायता के लिए ड्रोन का सहारा लिया गया। इसके साथ ही मीना और मक्का के रास्तों पर उन्नत कूलिंग सिस्टम लगाए गए हैं।
सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के सुरक्षा प्रवक्ता ने बताया कि सुरक्षा और यातायात योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। अधिकारियों के बेहतर भीड़ प्रबंधन के कारण इस बार किसी भी तरह की भगदड़ या दुर्घटना नहीं हुई और यात्रियों ने बेहद सुरक्षित माहौल में अपनी इबादत पूरी की। जनरल अथॉरिटी फॉर स्टैटिस्टिक्स (GASTAT) के अनुसार, इस साल हज में कुल 1,707,301 तीर्थयात्रियों ने हिस्सा लिया है।
क्या है ‘ताअजुल’ का नियम और यह कैसे काम करता है?
हज यात्रियों के पास ताशरीक के दूसरे दिन यानी 12वीं जुल्हिज्जा को जल्द प्रस्थान करने का विकल्प होता है, जिसे ‘ताअजुल’ (जल्दी विदाई) कहा जाता है। इसके तहत जो हाजी मीना से जल्दी निकलना चाहते हैं, वे दूसरे दिन कंकड़ मारने के बाद सूर्यास्त से पहले वहां से रवाना हो सकते हैं। हालांकि, जो तीर्थयात्री 12वीं जुल्हिज्जा को सूर्यास्त के बाद भी मीना में रुक जाते हैं, उन्हें वहां तीसरे दिन भी रुकना पड़ता है और अगले दिन फिर से कंकड़ मारने का अनुष्ठान पूरा करना अनिवार्य होता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
हज 2026 में कुल कितने हाजियों ने हिस्सा लिया?
जनरल अथॉरिटी फॉर स्टैटिस्टिक्स (GASTAT) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 के हज अनुष्ठान में कुल 1,707,301 तीर्थयात्रियों ने हिस्सा लिया है।
ताशरीक के दिनों में जमारात पर कंकड़ मारने का सही क्रम क्या है?
नियम के अनुसार हाजियों को सबसे पहले छोटे पिलर (जमारात अल-उला), उसके बाद मध्यम पिलर (जमारात अल-वुस्ता) और अंत में बड़े पिलर (जमारात अल-अकबा) पर सात-सात कंकड़ मारने होते हैं।
हज में ‘ताअजुल’ का क्या मतलब होता है?
ताअजुल के तहत हज यात्रियों को ताशरीक के दूसरे दिन यानी 12वीं जुल्हिज्जा को मीना से जल्दी प्रस्थान करने की अनुमति मिलती है, बशर्ते वे सूर्यास्त से पहले वहां से रवाना हो जाएं।